रिपोर्टर- प्रिया मगरराती
दुनिया के साथ अपनी प्रतिभा और अंतर्दृष्टि साझा करें। मे ने कई विकलांग के जीवन और कार्यों पर एक नज़र डाली, जिन्होंने हमारी संस्कृति पर एक छाप छोड़ी, जो सभी विकलांगों और पृष्ठभूमि के लोगों के लिए धन्यवाद की याद दिलाता है।
आज मे वो संघर्षपूर्ण इंसान की बात कर रहि हुँ जिन्होंने साबित कर दिखाया कि इंसान अपनी सोच से विकलांग होता है, अगर इंसान कि सोच बडी है तो हाथ पैरों से विकलांग व्यक्ति भी वो कर सकता है जो हाथ पैरो वाला सोच भी नही सकता ।
अगर व्यक्ति के इरादे मजबूत है तो कोई ऐसा फील्ड नही है
जहा एक विकलांग व्यक्ति कामियाब न हो ।
कुछ करने की सोचे और मेहनत के दम पर उन्होंने अपनी
बस भरोसा को आजमाया है।
नार्थ ईस्ट दिल्ली में रेहेना वाला प्रशांत एक डिसेबिलिटी पर्सन है । उन्हें बचपन से दोनो पैरों में प्रॉब्लम थी और
वो व्हीलचेयर यूज करता है। उसकी लोको मोटर डिसेबिलिटी प्रोब्लम है। प्रशांत ने अपना पढाई ग्रेजुएशन कर चुका है और साथ मे घर की खर्च पानी चलानी के लिए छोटा सा चाय की दुकान भी चलाता है। ये सब काम मे प्रशांत को फैमिली से बहुत सपोर्ट मिलती है।
प्रशांत पैरालंपिक गेम में खेल ते हुए 5 साल हो गया हैं । इन 5 सालों में प्रशांत ने 2 athletics नेशनल खेल,14 नेशनल व्हीलचेयर क्रिकेट मैच और 1 नेशनल व्हीलचेयर बास्केटबॉल खेल और 11 मैराथन खेल चुका है और और 2022 में नेशनल लेवल पर गेम खेल रहा है।प्रशांत को एक उज्ज्वल, प्रेरक और सफल जीवन के लिए
शुभ कामना।
