अधिवक्ता मुकेश आनंद की बढ़ती लोकप्रियता

 

जो कानूनों तथा मुकदमों (Laws and lawsuits) में हमारे पक्ष की और से न्यायालय बोलने वाला व्यक्ति ही (Court) मे प्रस्तुति देता है  उस व्यक्ति को हम वकील (lawyer) मानते है । वकील की पहचान हम उनके पहनावे से लगा सकते है। वकील की प्रमुख स्थिति उनके बात को न्यायलय के सामने अपनी बात को प्रस्तुत करने के तरीके , अपने ज्ञान के आधार पर, अपने कौशल तथा भाषा शक्ति के आधार पर वकीलो को न्यायालय मे प्रस्तुत किया जाता है। अधिंकांश लोगो द्वारा वकील को रखने का प्रमुख कारण इसे ही माना जाता है।

एक वकील के अदालत के प्रति प्रमुख कर्तव्य होते है -की अनुचित साधनों पर जोर देने वाले मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करने से इंकार करना,अपने कार्य पर खुद को झोंक देना,गलत कागजाद को जमा न करना,अपने कानूनी व्यवसाय के आधार पर अपना कार्य करना ,गरिमापूर्ण तरीके से कार्य करना,न्यायालय का सम्मान करना और विपक्ष के प्रति गैरकानूनी तरीके से कार्य करने से इंकार करना होता है।जी हां हम बात कर रहे हैं वह इन्सान की जो एक स्वतंत्र वकील जो रोजगार, आपराधिक रक्षा, संपत्ति, कानूनी प्रारूपण सहित कानून के विभिन्न क्षेत्रों में अभ्यास कर रहे हैं। उस एडवोकेट का नाम है मुकेश आनंद । मुकेश आनंद एक विशेषज्ञ रोजगार और श्रम वकील हैं, जिन्होंने कई ग्राहकों को वेतन बकाया की वसूली, अवैध समाप्ति, रोजगार अनुबंधों पर बातचीत, गैर-प्रतिस्पर्धा समझौतों और विच्छेद समझौतों में सलाह के साथ मदद की है और रोजगार से संबंधित कर्मियों के विवादों को हल करना,  श्रम कानूनों के उल्लंघन और ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, राज्य बीमा आदि से संबंधित औद्योगिक और श्रम मुद्दों में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच विवादों में कंपनियों और उनके प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करना, गैरकानूनी समाप्ति पत्र जारी करना, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न आईसीसी द्वारा जांच करने, साक्ष्य के मूल्यांकन, आईसीसी रिपोर्ट का मसौदा तैयार करने और सीपीसी कोड की निम्नलिखित आवश्यकताओं पर एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की स्थापना पर नियोक्ताओं को सलाह देना और  भारत में रोजगार समझौते का मसौदा तैयार करना और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) मामले सपोर्ट किया है।अधिवक्ता मुकेश आनंद के बारे मे बताए तो इन्होंने  1982 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में अधिवक्ता के रूप में शिक्षा की

पढ़ाई कि उसके बाद एलएलबी (1979 - 1982)।

 बीएससी, ए ग्रुप, बायोलॉजी - दिल्ली विश्वविद्यालय (1976 - 1979) की थी।मुकेश आनंद की वर्क अनुभव की बात करे तो इन्होंने सीनियर पार्टनर, जेनेसिस लॉ कंसल्टेंट्स (2017 -वर्तमान),

 वरिष्ठ स्थायी वकील - उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क और सेवा कर - दिल्ली उच्च न्यायालय (2007 - 2013), और केंद्र सरकार के वरिष्ठ वकील (कानून और न्याय मंत्रालय) - दिल्ली उच्च न्यायालय (2004 - 2014),वकील, आनंद एसोसिएट्स (1982 - 2019) किया है।इसके बाद इन्होंने प्रमुख अभ्यास क्षेत्र अप्रत्यक्ष कर अपने अप्रत्यक्ष कर (उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, सेवा कर, जीएसटी) मुकदमेबाजी में अखिल भारतीय विभिन्न मंचों के समक्ष ग्राहकों का प्रतिनिधित्व करने में माहिर हैं।साथ साथ अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में भी इन्होंने example2000 से अधिक मामलों में विभाग के वरिष्ठ स्थायी वकील के रूप में उपस्थित हुए, जिनमें से लगभग 350 मामलों का निपटारा किया गया।  अभिलेखों के अनुसार 98 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण विभाग के पक्ष में किया गया।  उनमें से कई निर्णय ऐतिहासिक हैं और विभिन्न पत्रिकाओं में रिपोर्ट किए जाते हैं।  उदाहरण के लिए: स्टर्लिंग एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम,  यूओआई (2010 का WP संख्या 6570, आदेश दिनांक 17.03.2011, दिल्ली उच्च न्यायालय); बाफना हेल्थकेयर प्रा.  लिमिटेड बनाम ,सीसीई 182 (2011) डीएलटी 243;माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन (इंडिया) प्रा.  लिमिटेड बनाम,सेवा कर आयुक्त और अन्य और   (2009) 227 सीटीआर (दिल्ली उच्च न्यायालय) 209;रैनबैक्सी लेबोरेटरीज लिमिटेड बनाम ,यूओआई और अन्य (2009 की WP संख्या 13940, आदेश दिनांक 18.12.2009, दिल्ली उच्च न्यायालय); विष्णु कुमार बनाम.  सीमा शुल्क आयुक्त (2010) 260 ईएलटी 356 (दिल्ली उच्च न्यायालय) होम सॉल्यूशंस रिटेल (इंडिया) लिमिटेड बनाम।  यूओआई (2010) 6 आंगनवाड़ी केंद्र 109 न्यूल (दिल्ली उच्च न्यायालय),सेंट - गोबेन ग्लास इंडिया लिमिटेड बनाम।  यूओआई (2009) 240 ईएलटी 495 (दिल्ली उच्च न्यायालय);नवशक्ति इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड बनाम।  सीमा शुल्क आयुक्त (2010) 254 ईएलटी 771 (दिल्ली उच्च न्यायालय); सीसीई बनाम।  डालमिया मैग्नेसाइट कॉर्पोरेशन (2016) 344 ईएलटी 100 (दिल्ली उच्च न्यायालय);

 टेरा फिल्म्स प्रा.  लिमिटेड बनाम।  सीमा शुल्क आयुक्त (2011) 268 ईएलटी 443 (दिल्ली उच्च न्यायालय)। सलाहकार सेवाएं दिया है।इतना ही नहीं उनके अधिवक्ता मुकेश आनंद ने कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक के क्षेत्रों में भी सॉफ्टवेयर समझौतों, फ्रेंचाइजी समझौते, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, दूरसंचार कानूनों आदि के लिए संयुक्त उद्यम सहयोग के मुद्दों पर सलाह और मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (निर्णय, अपील और रिट) और बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988 के संबंध में मुकदमेबाजी में विशेषज्ञता सलाह दिया है। और तो और मध्यस्थता और विवाद समाधान वाणिज्यिक मध्यस्थता और विवाद समाधान तंत्र के विभिन्न अन्य रूपों में प्रतिनिधित्व किया है। और तो और श्री आनंद ने फेमा और पीएमएलए के साथ-साथ मध्यस्थता अधिनियम के तहत विभिन्न लैंडमार्क मामले भी  किए हैं।इन तमाम चीजों की एक्सपीरियंस की बाते करे तो अधिवक्ता मुकेश आनंद की 40 से अधिक वर्षों का अनुभव है औरआने वाले समय को भी अच्छा वर्क के लिए बधाई और ऐसा ही अच्छे वर्क करते रही ये।





















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