Reporter - Priya Magarrati
रात के 3:00 बज रहे हैं, अचानक कोई आपके घर का दरवाजा तोड़कर जबरदस्ती अंदर घुस जाये। पहला रिऐक्शन क्या होगा? आपका सारे गंदे गंदे ख्याल दिमाग में आ रहे होंगे। उसमें खून खराबा तो जरूर होगा, है ना? लेकिन इन ख्यालों में अगर एक जंगली भेड़िया घुस जाये तो क्यों डर गए? चलो सपनों से बाहर आओ आपको किसी से मिलवातीं हूँ फटाफट भेड़िया बहुत ही वो फ़िल्म है जिसमें 2022 में बॉलीवुड की किस्मत पूरी तरह बंद है। ये चल गयी तो पुरानी सारी गलतियाँ माफ़ लेकिन ये पिट गयी तो डूबने के लिए चुल्लू भर पानी भी नहीं मिलेगा। समझ लीजिये तो चलेगी या पिटेगी आओ बताती हूँ। ये कहानी एक जंगल की है जिसमें रहने वाले कई सारे जानवरों का बड़ा सा घर बन चुका है। साफ है एकदम खतरनाक अजगर वाला लम्बा लम्बा एक काफी इंट्रेस्टिंग जानवर भी है जिसका नाम मिथुन है। अब ये सब तो आराम से रह रहे हैं कई 100 200 सालों से, लेकिन फिर इनके घर में कोई जबरदस्ती घुस जाता है। दुनिया का सबसे बड़ा राक्षस इंसान जो इस जंगल को काटकर बड़े बड़े मॉल, विदेशी कंपनियों के ऑफिस बनाकर अपना लालच शांत करना चाहता है, अब घर में कोई घुसेगा तो घर में रहने वाले शांत थोड़ी बैठेंगे। परिवार का मुखिया तो लड़े गाना सर इस जंगल का मुखिया एक भेड़िया हैं इच्छाधारी भेड़िया जो चाँद की रौशनी में हर उस राक्षस इंसान को कच्चा चबा जाता है, जिसके अंदर लालच छुपा है। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जानते है जब पहली बार ऐसा होता है की ये भेड़िया किसी को काटता है और वो मरता नहीं बच जाता है। उल्टा वो खुद भेड़िया बनकर शिकार पर निकल पड़ता है, क्या मतलब? कहानी में कितने सारे भेड़िया है, यही सोच रहे हैं और जब ये भेड़िया हम इंसानों को काट रहा है तो ये हीरो कैसे हुआ है? ये तो विलन हुआ है ना देखो बहुत फालतू की उम्मीद नहीं दूंगी। मैं आपको इस फ़िल्म से जितनी एक्स्पेक्टेशन लगा रखी थी, रिलीज से पहले उनको थोड़ा कम कर लीजिये, ऑलमोस्ट खत्म कर लो क्योंकि भेड़िया के अंदर आपको ज्यादा कुछ नहीं मिलेगा। हॉरर सीन्स का तो सिर्फ इंतजार करते रह जाओगे एंड तक एक सेकंड के लिए भी आपको ज़रा सा भी डर नहीं लगेगा। अब आप सोच रहे होंगे चलो कॉमेडी तो मिलेंगे, फैमिली के साथ एन्जॉय कर लेंगे। सॉरी बॉस उस लेवल की नहीं है। आप कुछ मोमेंट्स है जहाँ पे हँसी आएगी लेकिन बहुत ही कम है और फनी सीन्स थोड़े फोर्स टाइप के हैं। जबरदस्ती हंसाने का ट्री किया जाता है। लाउड डायलॉग बोलकर नैचरल ह्यूमर नहीं मिलेगा। हाँ, लेकिन हिमेश रेशमिया का फ़िल्म में कुछ ऐसा इस्तेमाल किया गया है जहाँ पे आप पे ऐसी कंट्रोल नहीं होगी। अब तीसरी और आखिरी उम्मीद आपके दिल में होगी। स्त्री को लेकर चलो वो मिल गयी तो पैसा वसूल हो जायेगा। मेरी भी सेम टु सेम फीलिंग सीन लेकिन साइड ली भेड़िया एक इंडीविजुअल फ़िल्म है। इसका पुराने किसी कैरेक्टर से लेना देना नहीं है। मतलब फिलहाल नहीं है। फ्यूचर में तो कुछ भी हो सकता है। इस बार दिल टूट जाएगा। हाँ बढ़िया वाला मज़ा सरप्राइजिंग ही फ़िल्म खत्म होने के बाद महसूस होगा आप को पोस्ट कर एट सीन में वहाँ सिर्फ कुछ मिनट्स में ये फोटो आपके दिमाग में जरूर घूमने वाला है। स्पेशल इफेक्ट्स कमाल के हैं नो डाउट फ़िल्म का बजट कुछ खास नहीं है लेकिन वीएफएक्स क्वालिटी बुरी नहीं है। स्पेसिअली वो सीन जिसमें भेड़िया खुद मौजूद हैं, वो सीन्स आपको काफी इंप्रेस करेंगे। प्लस जंगल का बैकग्राउंड यूज़ कर के मेकर्स ने फ़िल्म को कलर से भर दिया है। इन शोर्ट देखो भेड़िया का कॉन्सेप्ट जबरदस्त है, खतरनाक दुश्मन है, उनसे लड़ने वाला एक सुपर हीरो भी है और अपना देसी सुपर नैचरल ऐंगल भी है। जादू टोने वाला लेकिन सही से इस्तेमाल करने वाली एक मजबूत यूनिक कहानी मिसिंग है उल्टा स्टोरी लाइन थोड़ी बच्चो वाली महसूस होगी आपको जो हमारी एक्सपेक्टेशन थी ना इस हॉरर यूनिवर्स को लेकर उस में इस बार फ़िल्म से हॉरर गायब हो गया है। इवन भेड़िया के सीन्स में भी डरना लगना इस फ़िल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है। एक्टिंग में वरुण धवन ठीक ठाक है। वो अपने कैरेक्टर में घुसे हुए है। बाकी उनका 50% काम तो भेड़िया ने आसान कर दिया। बच गए कॉमेडी सीन्स। उसमें वो मामला संभाल लेते हैं। ओवर एक्टिंग और फनी के बीच में बहुत पतली सी लाइन खींच रखी है इन्होंने। कृति का रोल फ़िल्म में इम्पोर्टेन्ट है लेकिन ज्यादा लंबा नहीं है इसलिए उनके फैन्स थोड़ा डिसअप्पोइंट जरूर हो सकते हैं। साइट कैरक्टर इसमें अभिषेक बेनर्जी फ़िल्म की बैकबोन है। ये नहीं होते तो दोस्त फ़िल्म ठंडी पड़ जाती है। दीपक डोबरियाल का कैरेक्टर काफी सवाल लेकर आएगा आपके मन में जिसकी वजह से दिमाग थोड़ा उलझा रहेगा। कहानी में कहानी को इंट्रेस्टिंग बनाया है इन्होंने। भेड़िया में पोटेंशिअल बहुत ज्यादा था ऐंड हम फैन्स काफी कुछ डिज़र्व करते थे इस फ़िल्म से, लेकिन सैड ली मेकर्स ने ईजी रास्ता पकड़ा और पतली गली से निकल गया। ऐवरेज फ़िल्म बना के मेरी तरफ से फ़ोन को मिलेंगे। पांच में से तीन स्टार्स, पहला तो कॉन्सेप्ट हॉलीवुड मैं जरूर ऐसी फ़िल्म बनती है लेकिन बॉलीवुड में एक अच्छी कोशिश है। दूसरा फ़िल्म के वीएफएक्स आपको विज़ुअली सैटिस्फाइड करेंगे। स्पेशल इफेक्ट्स से कोई शिकायत नहीं है। तीसरा स्टार दो चीजों में डिवाइड करूँगी मैं पहला तो साइट कैरेक्टर्स की परफॉर्मेंस जबरदस्त है और आधा स्टार क्लाइमैक्स। मुझे नहीं पता बाकी लोगों को कैसा लगा? लेकिन मुझे इमोशनल फील हुआ। नेगेटिव में एक साथ तो बच्चो वाली कहानी, ज्यादा ट्विस्ट एंड टर्न या फिर हॉरर ऐंगल नहीं मिलेगा। दूसरा ये जो थ्री वाला हाइप मिल रहा था, इसको उनको उसको थोड़ा इस्तेमाल करना तो बनता था।
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