हिंदी पहचान परंपरा भविष्य




                     लेखक -आचार्य डॉ. मुरली मनोहर भट्ट
                     (शिक्षा एवं सामाजिक सरोकार )
                       उत्तरकाशी,उत्तराखंड
भारत विविधताओं का देश है, जहाँ भाषाई बहुलता इसकी सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहर है। इस विविधता में हिंदी वह भाषा है जिसने भारतीय समाज को एक साझा सूत्र में बाँधा। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में अंगीकृत किया। तभी से प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह अवसर केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि हिंदी की ऐतिहासिक यात्रा, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर है। हिंदी का उद्भव संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं की परंपरा से हुआ। संस्कृत से प्राकृत और फिर अपभ्रंश होते हुए हिंदी का आधुनिक रूप सामने आया।प्रारंभ में अवधी और ब्रजभाषा साहित्य की प्रमुख भाषाएँ रहीं। तुलसीदास की रामचरितमानस अवधी में और सूरदास की साहित्यिक रचनाएँ ब्रजभाषा में रची गईं। 19वीं शताब्दी में खड़ी बोली को हिंदी का मानक रूप स्वीकार किया गया। इसी पर आधुनिक हिंदी गद्य और साहित्य की परंपरा विकसित हुई।हिंदी अनेक बोलियों का संगम है, जो क्षेत्रीय विविधताओं का परिचय देती हैं। इनमे ब्रजभाषा ,मथुरा और आगरा क्षेत्र की, कृष्ण भक्ति साहित्य की धारा की प्रमुख भाषा है।अवधी अवध क्षेत्र की, तुलसीदास की रचनाओं की प्रमुख भाषा इसी प्रकार,भोजपुरी भाषा बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की, आज वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुकी है। मगही और मैथिली भी बिहार क्षेत्र की, लोककथाओं और कवियों की भाषा है। बुंदेली और बघेली मध्य प्रदेश क्षेत्र की, वीर रस और लोकगीतों से समृद्ध भाषा है। इसी तरह उत्तराखंड क्षेत्र की गढ़वाली और कुमाऊनी भाषा यहां की, लोकगीतों और नृत्य परंपरा की जीवंत बोलियाँ।  इन बोलियों ने हिंदी साहित्य और संस्कृति को गहराई और व्यापकता दी है।हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की वाहक भी है,लोकगीत, लोककथाएँ और नृत्य परंपराएँ हिंदी की बोलियों से जीवित हैं। धार्मिक ग्रंथों और भक्ति आंदोलन ने हिंदी को जन-जन तक पहुँचाया है, प्रमुख साहित्यकारोंजैसे तुलसीदास, सूरदास, कबीर, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा और निरालाने हिंदी को साहित्य की उच्च परंपरा प्रदान की। हिंदी ने सिनेमा और नाटक को लोकप्रिय संस्कृति की भाषा बना दिया।  राजभाषा के रूप में हिंदी की मजबूत संवैधानिक स्थिति है। संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को देवनागरी लिपि में भारत की राजभाषा घोषित किया गया।अनुच्छेद 351 हिंदी को समृद्ध करने और विकसित करने का प्रावधान करता है। अंग्रेज़ी को प्रारंभिक रूप से सहायक भाषा माना गया था, किंतु आज भी हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी का प्रयोग व्यापक है।संसद, प्रशासन और सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग धीरे-धीरे बढ़ा है, किंतु उच्च न्यायालय और उच्च शिक्षा में अंग्रेज़ी का प्रभुत्व अभी भी स्पष्ट है। हिंदी और अंग्रेज़ी का भारत में सहअस्तित्व है भारत में हिंदी और अंग्रेज़ी का संबंध पूरक है।अंग्रेज़ी अंतरराष्ट्रीय संचार ,विज्ञान-प्रौद्योगिकी की भाषा है। हिंदी जनमानस और सांस्कृतिक पहचान की भाषा है।आधुनिक समय में "हिंग्लिश" (हिंदी + इंग्लिश) का प्रयोग युवाओं में लोकप्रिय हो गया है। आवश्यकता इस बात की है कि हिंदी ज्ञान-विज्ञान और प्रशासन की भाषा बने, वहीं अंग्रेज़ी को वैश्विक अवसरों के लिए साधन रूप में अपनाया जाए। हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।लगभग 70–75 करोड़ लोग हिंदी बोलते या समझते हैं।फिजी में "फिजी-हिंदी" आधिकारिक भाषा है।मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना जैसे देशों में हिंदी शिक्षा और सांस्कृतिक आयोजनों का हिस्सा है।अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और अन्य देशों में प्रवासी भारतीयों ने हिंदी को जीवित और प्रचलित बनाए रखा है।बॉलीवुड फ़िल्में, धारावाहिक और गीतों ने हिंदी को वैश्विक लोकप्रियता दिलाई है,डिजिटल युग में हिंदीकी स्थिति और भी मजबूत हुई है।आज हिंदी इंटरनेट और तकनीक की भाषा बन चुकी है।गूगल, माइक्रोसॉफ़्ट और अन्य कंपनियाँ हिंदी को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर प्राथमिक भाषा मानती हैं।
सोशल मीडिया (यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक) पर हिंदी कंटेंट की खपत तेजी से बढ़ रही है। डिजिटल अनुवाद और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय संचार की दिशा में और सशक्त बनाया है। उच्च शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अंग्रेज़ी पर अत्यधिक निर्भरता। प्रवासी देशों में नई पीढ़ी में हिंदी के प्रति कम झुकाव हिंदीके लिए प्रमुख चुनौतियों के रूप में उभरा है,हिंग्लिश के कारण शुद्ध हिंदी का स्वरूप सीमित हो रहा है,प्रशासन और न्यायपालिका में हिंदी का अपेक्षाकृत कम प्रयोग भी हिंदी के विकास के लिए चुनौती बनी हुई है। हिंदी मीडिया, फिल्म, साहित्य और पत्रकारिता में नए अवसर खोल रही है,वैश्विक स्तर पर प्रवासी भारतीयों के कारण हिंदी का प्रसार निरंतर बढ़ रहा है।तकनीक और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म हिंदी को विश्व की ज्ञान-भाषा बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।यदि सरकार शिक्षा और प्रशासन में हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता दे, तो यह विश्व की प्रमुख आधिकारिक भाषाओं में शामिल हो सकती है। हिंदी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला है। यह केवल राजभाषा ही नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की भाषा है। विविध बोलियों और सांस्कृतिक परंपराओं ने इसे समृद्ध और जीवंत बनाया है। आज आवश्यकता है कि हम हिंदी को केवल भावनात्मक या सांस्कृतिक भाषा तक सीमित रखें, बल्कि इसे ज्ञान-विज्ञान, तकनीक और वैश्विक संचार की भाषा बनाने का संकल्प लें। हिंदी दिवस मनाने और हिंदी आंदोलन चलाने का यही वास्तविक उद्देश्य है। हिंदी को राष्ट्रभाषा राजभाषा के साथ ही वैश्विक भाषा बनने तक हिन्दी के लिए सभी भारतीयों को अपने दैनिक जीवन में अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग करना होगा। हिंदी भारत की विश्व गुरु की पुनर्प्रतिष्ठा में सहायक सिद्ध होगी।जननी जन्मभूमि मातृभाषाश्च स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात ~जन्म देने वाली मां,जन्मभूमि और मातृ भाषा स्वर्ग से भी बढ़कर है।।
और नया पुराने