संविधान दिवस पर यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण: पीएम मोदी ने कहा – यह बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि


भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस के पावन अवसर पर एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा (बस्ट) का अनावरण किया गया है। यह विश्व स्तर पर बाबासाहेब के योगदान को मिली सबसे बड़ी मान्यताओं में से एक है।पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल  से लिखा:“यह अत्यंत गर्व की बात है कि आज संविधान दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण हुआ। यह डॉ. आंबेडकर और संविधान निर्माण में उनकी भूमिका को सच्ची श्रद्धांजलि है। उनके विचार और आदर्श आज भी करोड़ों लोगों को ताकत और उम्मीद देते हैं।
क्यों है यह घटना ऐतिहासिक?: डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पी थे।
वे दलितों, शोषितों और वंचितों के सबसे बड़े मसीहा माने जाते हैं।
यूनेस्को (UNESCO) विश्व की सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संस्था है।
यूनेस्को मुख्यालय में किसी भारतीय व्यक्तित्व की प्रतिमा लगना अपने आप में अभूतपूर्व है।
यह भारत के संविधान और डॉ. आंबेडकर के वैश्विक योगदान को अंतरराष्ट्रीय मान्यता है।
हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस (Samvidhan Divas) के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन साल 1949 में संविधान सभा ने भारत के संविधान को अंगीकृत किया था। डॉ. आंबेडकर संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष थे और उन्हेंआधुनिक भारत का मनुभी कहा जाता है।
विश्व स्तर पर बाबासाहेब की बढ़ती स्वीकार्यता:अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा सहित कई देशों में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमाएं लगाई जा चुकी हैं।विश्व के कई विश्वविद्यालयों में उनके विचारों पर शोध होता है।
यूनेस्को में प्रतिमा अनावरण से अब उनके विचार पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बनेंगे।
पीएम मोदी के पोस्ट पर लाखों लोगों ने अपनी खुशी जाहिर की। कई यूजर्स ने लिखा:“जय भीम, जय भारत।
बाबासाहेब का सपना अब विश्व पटल पर ।भारत का गौरव बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री जी को कोटि-कोटि धन्यवाद।
यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण सिर्फ एक मूर्ति का अनावरण नहीं, बल्कि समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता के सिद्धांतों की विश्व स्तर पर जीत है। यह भारत के संविधान की गरिमा और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अमर योगदान का सम्मान है।

 

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