मौनी अमावस्या 2026: प्रयागराज संगम में 4.52 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी – योगी आदित्यनाथ का विशेष संदेश

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौनी अमावस्या 2026 के पावन अवसर पर एक भावपूर्ण संदेश साझा किया है। माघ मेला 2026 के दौरान तीर्थराज प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम में 4.52 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर सनातन संस्कृति की शाश्वत परंपरा को नमन किया। यह संख्या प्रशासन के अनुमान (लगभग 3 करोड़) से कहीं अधिक है, जो इस बार की भारी भीड़ और धार्मिक उत्साह को दर्शाती है।योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक X (ट्विटर) हैंडल  पर लिखा:"मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर आज सनातन संस्कृति की तपोभूमि तीर्थराज प्रयाग में पावन संगम में 4.52 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर भारतीय संस्कृति की शाश्वत परंपरा को नमन किया।
त्रिवेणी संगम में स्नान का पुण्य लाभ अर्जित करने वाले सभी पूज्य साधु-संतों, धर्माचार्यों, कल्पवास के लिए पधारे साधकों एवं श्रद्धालुओं का कोटिशः अभिनंदन।
इस पावन स्नान पर्व के शांतिपूर्ण सफल आयोजन हेतु पुलिस प्रशासन, मेला प्रबंधन, स्वच्छता सेवक, स्वयंसेवी संगठन, नाविक बंधु तथा प्रदेश सरकार के सभी विभागों को हार्दिक साधुवाद।"
यह ट्वीट सनातन धर्म की गहराई, आस्था की शक्ति और उत्तर प्रदेश सरकार की बेहतरीन व्यवस्था को रेखांकित करता है।
मौनी अमावस्या माघ मास की अमावस्या होती है, जब मौन रहकर स्नान, दान और तप का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती) में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।2026 में माघ मेला (जिसे मिनी कुंभ भी कहा जाता है) में मौनी अमावस्या सबसे बड़ा स्नान पर्व था। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु संगम तट पर उमड़ पड़े। घने कोहरे के बावजूद लाखों-करोड़ों लोग "हर-हर गंगे" के जयकारों के साथ डुबकी लगाते रहे।
मुख्य बातें: -4.52 करोड़+ श्रद्धालु (प्रशासन का अनुमान 3 करोड़ था, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे बहुत अधिक) 
-सुरक्षा व्यवस्था: AI कैमरे, ड्रोन, पुलिस, PAC, UP ATS और बड़ी संख्या में जवान तैनात 
-विशेष: हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा (योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर) 
-शांतिपूर्ण आयोजन: कोई बड़ी घटना नहीं, सभी ने पुण्य लाभ प्राप्त किया
योगी आदित्यनाथ सरकार की सराहना क्यों?: योगी आदित्यनाथ ने केवल श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया, बल्कि पूरे आयोजन में लगे सभी विभागों और स्वयंसेवकों को धन्यवाद दिया। इससे साफ झलकता है कि:
-मेला प्रबंधन में आधुनिक सुविधाएं (घाट, स्वच्छता, नाव आदि)
-पुलिस और प्रशासन की तत्परता
-स्वच्छता सेवकों और नाविकों की मेहनत।
-स्वयंसेवी संगठनों का योगदान।
यह सब मिलकर मौनी अमावस्या 2026 को यादगार और सुरक्षित बनाया।
मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों (विशेषकर गंगा या संगम) में स्नान करना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान पापों का नाश करता है और पिछले कई जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाता है, साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है, जो आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की ओर अग्रसर करती है। यह स्नान विशेष रूप से पितरों को प्रसन्न करने वाला होता है, जिससे पितृदोष का निवारण होता है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।
इसके अलावा, मौनी अमावस्या पर स्नान और मौन व्रत के संयोजन से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, क्योंकि मौन रहकर ध्यान और साधना करने से आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे इच्छाएं शीघ्र फलित होती हैं। यह दिन सनातन परंपरा से गहरा जुड़ाव प्रदान करता है, क्योंकि यह माघ मास की अमावस्या है, जो कुंभ मेले और तीर्थ स्नान की परंपरा से जुड़ी हुई है, तथा भगवान विष्णु, शिव और सूर्य देव की आराधना के साथ पितरों का तर्पण करने का अवसर देता है।सबसे महत्वपूर्ण रूप से, इस दिन मौन व्रत धारण करके स्नान करना आत्म-शुद्धि का सर्वोत्तम साधन है। मौन से वाणी की शुद्धि होती है, मन की अशांति दूर होती है, विचार शांत होते हैं और आंतरिक शांति तथा आत्मचिंतन की प्राप्ति होती है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है। इस प्रकार, मौनी अमावस्या का स्नान केवल बाहरी शुद्धि प्रदान करता है, बल्कि आंतरिक रूप से भी व्यक्ति को पवित्र और बलवान बनाता है।

 

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