जब
दुनिया ड्रोन को महज मनोरंजन
का साधन समझ रही थी, तब राहुल ने
उसमें किसानों के लिए एक
क्रांतिकारी समाधान देखा—सिंचाई की समस्या का
हल, कम लागत वाली
तकनीक और ग्रामीण भारत
की आँख एवं हाथ। उसने लो-कॉस्ट ड्रोन
बनाए, एनर्जी एफिशिएंट जनरेटर विकसित किए, बैटरी से चलने वाले
कृषि यंत्र तैयार किए, कोरोना काल में सैनिटाइजिंग मशीनें बनाईं और घास काटने
तथा खेत जोतने की मशीनें भी
तैयार कीं। यह सब उसने
उस समय किया जब वह अभी
किशोरावस्था में था, जेब खाली थी, लेकिन दिल में गरीब किसानों की सेवा का
अटूट जज़्बा भरा था।
जब
राहुल ने मदन मोहन
मालवीय यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर
में बीटेक में दाखिला लिया, तो घर-परिवार
और समाज ने राहत की
सांस ली—“अब तो लड़के
की ज़िंदगी बन गई।” लेकिन राहुल ने भीड़ से
अलग सोचने का साहस दिखाया।
उसने डिग्री के पीछे नहीं
भागा; उसने ज्ञान, प्रयोग और नवाचार को
तरजीह दी। वह बीटेक ड्रॉपआउट
तो हो गया, मगर
मेहनत, सीखने और सपनों से
कभी ड्रॉपआउट नहीं हुआ।आज वह उत्तर प्रदेश
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से संबद्ध डिज़ाइन
इनोवेशन एवं इनक्यूबेशन सेंटर में एक सफल ड्रोन
इनोवेटर के रूप में
कार्य कर रहा है।
महाभारत
में संजय दूर बैठकर युद्ध का पूरा दृश्य
देख सकते थे। आज का यह
संजय-पुत्र—राहुल सिंह—ड्रोन के माध्यम से
खेतों की लड़ाई, आपदा
की चुनौतियाँ, स्वास्थ्य और सुरक्षा के
मोर्चे न केवल देखता
है, बल्कि उनके समाधान भी देता है।जब
वह ड्रोन उड़ाता है, तो वह केवल
एक मशीन नहीं उड़ाता—वह उन अनगिनत
बच्चों के सपनों को
उड़ान देता है, जो आज भी
किसी असमान छप्पर वाली झोपड़ी में मजदूरी, गरीबी और मजबूरी के
बीच जी रहे हैं।
यह
कहानी महज एक बीटेक ड्रॉपआउट
की नहीं है, यह मेहनत, हिम्मत
और खुद पर विश्वास की
प्रेरक कहानी है। डिग्री रास्ता तो दिखा सकती
है, लेकिन मंज़िल तक पहुँचाती हमारी
मेहनत ही है। अगर
हालात कमज़ोर हैं, तो सपनों को
और मज़बूत बनाइए; अगर संसाधन नहीं हैं, तो अपनी सोच
को ही सबसे बड़ा
संसाधन बना लीजिए। राहुल सिंह आज उस नए
भारत का प्रतीक बन
चुके हैं—जो गरीबी में
जन्म लेकर भी उम्मीदों के
पंख लगा लेता है। क्योंकि जहाँ हौसले ऊँचे हों, वहाँ आसमान भी छोटा पड़
जाता है। राहुल
सिंह साबित करता है कि गरीबी
कितनी भी गहरी हो,
अगर हौसला हो तो आसमान
छूना मुश्किल नहीं। यह भावुक कहानी
हमें रुलाती भी है और
प्रेरित भी करती है
कि हर गरीब बच्चे
तक यह संदेश पहुंचे
– "तुम भी उड़ सकते
हो!"
