जानिए सरिता की प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने बचपन की शारीरिक परेशानी और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और आज एक सफल फैशन डिजाइनर बनकर 25 से अधिक पुरस्कार जीत चुकी हैं।कहते हैं कि अगर इंसान के भीतर हौसला और मेहनत का जुनून हो, तो कोई भी मुश्किल उसके सपनों को रोक नहीं सकती। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है सरिता की, जिन्होंने बचपन से ही कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर आज एक अलग पहचान बना ली है।
सरिता बताती हैं कि जब वह केवल 5 साल की थीं, तभी उन्हें चलने में परेशानी होने लगी। परिवार ने डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि उनके पैर की हड्डी टूट चुकी है। डॉक्टरों ने सलाह दी कि 18 साल की उम्र के बाद ही ऑपरेशन संभव होगा।समय के साथ उनकी परेशानी बढ़ती गई और उनका एक पैर लगभग 3 इंच छोटा हो गया। चलना और सामान्य काम करना मुश्किल हो गया, लेकिन इन परिस्थितियों के बावजूद सरिता ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। सरिता का परिवार एक साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से है। वे अपने माता-पिता और चार भाई-बहनों के साथ किराए के घर में रहती थीं। उनके पिता शादी और पार्टियों में खाना बनाने का काम करते थे, जबकि उनकी मां घर पर रहकर पांच बच्चों की परवरिश करती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी, इसलिए धीरे-धीरे सभी बच्चों ने घर के कामों में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। सरिता की बड़ी बहन ने सिलाई सीखना शुरू किया और वहीं से सरिता को भी इस काम में रुचि हो गई। उन्होंने अपनी बहन से सिलाई सीखी और धीरे-धीरे कपड़े डिजाइन करना शुरू कर दिया। उस समय स्मार्टफोन और इंटरनेट की सुविधाएं भी ज्यादा नहीं थीं, लेकिन सीखने की इच्छा इतनी मजबूत थी कि सरिता लगातार नए डिजाइन बनाने की कोशिश करती रहीं। सरिता ने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और 8वीं कक्षा में ही बाहर से कपड़े सिलने के ऑर्डर लेने लगीं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने ITI में दाखिला लेने की कोशिश की, लेकिन उनके पैरों की परेशानी के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिल सका। मशीन चलाने में होने वाली कठिनाई के कारण उन्हें वहां से मना कर दिया गया। यह पल उनके लिए काफी निराशाजनक था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। समय के साथ जब टच स्क्रीन मोबाइल फोन आने लगे, तो सरिता ने इंटरनेट और वीडियो के माध्यम से नए-नए डिजाइन सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उनका काम बेहतर होता गया और लोगों को उनके बनाए कपड़े पसंद आने लगे। अपने डिजाइन किए हुए कपड़ों को लोगों तक पहुंचाने के लिए सरिता ने मॉडलिंग की दुनिया में भी कदम रखा। उनके डिजाइन और आत्मविश्वास ने लोगों का ध्यान खींचा और देखते ही देखते उन्होंने कई फैशन शो में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। आज तक सरिता 25 से अधिक पुरस्कार जीत चुकी हैं और अपने शहर से बाहर जाकर भी कई फैशन शो में हिस्सा ले चुकी हैं। आज सरिता अपने घर से ही सिलाई और डिजाइनिंग का काम करती हैं और ऑनलाइन ऑर्डर भी लेती हैं । उनके काम की पहचान धीरे-धीरे बढ़ रही है और लोग उनके डिजाइन की तारीफ करते हैं। जब लोग उनके माता-पिता से कहते हैं कि “आपकी बेटी बहुत सुंदर कपड़े बनाती है,” तो उनके माता-पिता को बेहद गर्व महसूस होता है।सरिता मानती हैं कि उनकी सफलता के पीछे उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान है। शादी के बाद भी उनके सास-ससुर और पति उन्हें आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करते हैं। जब भी कोई फैशन शो या इवेंट होता है, उनके पति हमेशा उनके साथ जाते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं। सरिता की कहानी यह साबित करती है कि अगर इंसान के अंदर हिम्मत, मेहनत और सपनों को पूरा करने का जुनून हो, तो कोई भी परिस्थिति उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।“जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास और परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत होता है।”