33 साल का संघर्ष… और हर दिन एक नई जीत नीरू गौतम की प्रेरणादायक कहानी

 

                                         जब जिंदगी अचानक मोड़ लेती है, तो दो रास्ते होते हैंया तो इंसान टूट जाए, या खुद को इतना मजबूत बना ले कि दुनिया उसके सामने झुक जाए। नीरू गौतम ने दूसरा रास्ता चुनाऔर आज उनकी कहानी लाखों लोगों के लिए उम्मीद की रोशनी बन चुकी है। 1972 में जन्मी नीरू एक खुशमिजाज, जिंदगी से भरपूर और घूमने-फिरने की शौकीन युवती थीं। हर पल को जीने वाली इस लड़की के सपने बड़े थे, और दिल उससे भी बड़ा। लेकिन 1994 में किस्मत ने एक कठिन परीक्षा लीउन्हें एक लाइलाज बीमारी का सामना करना पड़ा। एक ऐसा सच, जो किसी को भी तोड़ सकता था। लेकिन नीरू ने हार मानना नहीं सीखा था। 33 सालों तक उन्होंने हर दर्द को मुस्कान के पीछे छुपाकर जिया। परिवार, दोस्तों का साथ और अटूट विश्वास उनके सबसे बड़े सहारे बने। 15 साल तक इलाज का इंतज़ार करने के बाद, 2008 में उन्होंने एक सच्चाई को स्वीकार किया—“जीवन परफेक्ट नहीं होता, लेकिन गरिमा के साथ जिया जा सकता है।” यहीं से शुरू हुई एक नई कहानीएक नई पहचान।उन्होंने खुद को सीमाओं में नहीं बांधा, बल्कि सीमाओं को ही तोड़ दिया। Ministry of Social Justice के ‘Sahyogi’ प्रोग्राम में National Coordinator बनकर उन्होंने दिव्यांग लोगों को सहायक मित्रों से जोड़ने का काम किया। Commonwealth Games के सभी स्टेडियम्स की accessibility audit से लेकर Delhi University के लिए accessible buses डिजाइन करनाउनका हर कदम समाज को आगे बढ़ाने के लिए था। यहाँ तक कि उन्होंने खुद अपनी accessible गाड़ी बनाईजो आज कई लोगों के लिए उम्मीद का वाहन बन चुकी है। उनकी मेहनत और समर्पण को 2011 में सम्मान मिला, जब उन्हें Long Service Achievement Award से नवाज़ा गया, जिसे Sushma Swaraj द्वारा प्रदान किया गया।लेकिन नीरू यहीं नहीं रुकीं…2013 में उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसने समाज की सोच बदल दी—Inclusive Dandiya Program उन्होंने महसूस किया कि त्योहार सभी के लिए होने चाहिए, सिर्फ कुछ लोगों के लिए नहीं। और उन्होंने इसे सच कर दिखाया।आज उनका मिशन बेहद साफ और शक्तिशाली हैहर घर में disability awareness होनी चाहिए, ताकि अगर कभी ये किसी अपने के जीवन में आए, तो उसे सहानुभूति नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा मिले। नीरू गौतम की कहानी सिर्फ एक इंसान की कहानी नहीं हैयह हौसले की परिभाषा है,यह उम्मीद की आवाज़ है,यह उस जज़्बे का नाम है जो कहता है—“हालात नहीं, हमारा नजरिया हमारी ज़िंदगी तय करता है।अगर जिंदगी आपको गिराती हैतो नीरू गौतम की तरह उठिए,और इतना ऊंचा उठिए कि आपकी कहानी दूसरों को जीना सिखा दे।याद रखिएकमज़ोरी शरीर में हो सकती है,लेकिन ताकत हमेशा इरादों में होती है।

 

 

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