हिमालय ग्लेशियल बाढ़ के कारण नेपाल-तिब्बत सीमा पर 160 की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

                                                                       हिमालय के ऊंचे इलाकों में ग्लेशियर के हिस्से के ढहने से नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण ग्लेशियल फ्लैश फ्लड आया है। रसुवा जिला (नेपाल) और ग्यिरोंग काउंटी (तिब्बत) में इस आपदा ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 1,500 लोग लापता हैं। इनमें सैकड़ों विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल हैं। बुधवार सुबह करीब 17,000 फीट (लगभग 5,200 मीटर) ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटकर नदी घाटी में गिर गया। बर्फ और चट्टान का यह विशाल ढेर ल्हेन्दे नदी (तिब्बत) में समा गया। मलबे ने अस्थायी रूप से नदी को अवरुद्ध किया, फिर प्राकृतिक बांध टूटने से नीचे की ओर तेज बाढ़ गई। यह बाढ़ नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र तक पहुंच गई। रसुवा जिले के तिमुरे, स्याब्रुबेसी और आसपास के गांवों में सड़कें, पुल, घर और जलविद्युत परियोजनाएं बह गईं। तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर भी भारी नुकसान हुआ।  नेपाल में अधिकांश मौतें दर्ज की गईं (लगभग 157-165) तिब्बत में तीन मौतें बताई गई हैं। लापता लोगों की संख्या दोनों तरफ मिलाकर करीब 1,500 है। इनमें भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों के सैकड़ों पर्यटक शामिल हैं। कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर थे। साधगुरु जग्गी वासुदेव ने बताया कि उनके ईशा फाउंडेशन के समूह के लगभग 80 सदस्य ग्यिरोंग में लापता हैं। उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए चीन अधिकारियों से सम्मानपूर्वक खोज अभियान में सहायता करने की अनुमति मांगी है। भारत ने भोजन, दवाइयां और आवश्यक सामान लेकर राहत उड़ानें भेजीं। नेपाल में हेलीकॉप्टरों से बचाव और राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। कठिन पहाड़ी इलाका, क्षतिग्रस्त सड़कें-पुल और बिजली परियोजनाएं काम को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं। दोनों देशों की टीमों ने सैकड़ों लोगों को बचाया है, लेकिन मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका बनी हुई है। हिमालय में ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ऐसे ग्लेशियल कोलैप्स और फ्लैश फ्लड (GLOF जैसी घटनाएं) क्षेत्र के लिए बढ़ता खतरा बन चुके हैं। विशेषज्ञ इस घटना को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं।यह आपदा केवल स्थानीय समुदायों बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए भी बड़ी त्रासदी है। खोज और राहत कार्य जारी हैं। प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारी बचाव अभियान तेज करने पर जोर दे रहे हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

और नया पुराने