सच में राम हैं आप.....बस यही बात कोई नहीं बोला

  


रामायण, महाभारत। शिव भागवत जैसे जीतने भी ग्रंथ है, शास्त्र है। ये हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर है। ये हमारी संस्कृति है। ये हमारी जोड़ है। सारी मानव सभ्यता के लिए ये नींव के समान है। और ना तो नीम को हिलाया जा सकता है और ना ही जड़ को बदला जा सकता है। नी विचार से किसी भी तरह का खिलवाड़ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बिल्कुल भी ठीक नहीं है। हमें इन शास्त्रों से संस्कार मिलते हैं। जीवन का आधार मिलता है। ये धरोहर ही हमें जीने की कला सिखाती है। हमारी संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। दोस्तों 500 साल के संघर्ष, अथक और जद्दोजहद के बाद। जानें कितना वक्त बहाने के बाद हमें राम मंदिर के पक्ष में निर्णय मिला। और वहाँ एक भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। जो 2024 तक पूरा भी हो जाएगा। अप्रिशिएट करने वाली बात यह है कि मंदिर को भव्यता देने के साथ साथ उसकी आत्मा और मौलिकता को जिओ का त्यों रख कर ये मंदिर बन रहा है। हमें अपनी सभी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरो और मान्यताओं को जैसी वो हैं वैसी ही बनाए रखना चाहिए। उनमें किसी भी तरह के बदलाव की न तो जरूरत है, ना करना चाहिए और ना ही किसी को किसी और को करने देना चाहिए। भला कोई अपनी व्हील आता है क्या? कोई अपनी जड़ें बदलता है क्या? हमारी धार्मिक, सांस्कृतिक मान्यताओं और परंपराओं को। किसी भी तरह का कोई नयापन देने की आवश्यकता नहीं। देखिये मेरा प्रयास और कर्म तो यही है कि मैं इस जेनरेशन को और अगली पीढ़ी को भी वही सिखाओ, वही बताऊँ, वहीं दिखाऊ जो वास्तव में सत्य है, शाश्वत है और सनातन है। एक बात और सोचने वाली है। किसी और धर्म की परंपरा या मान्यता में जब किसी भी प्रकार का बदलाव या नयापन नहीं किया जाता तो हमारी सनातन धर्म की मान्यताओं, परंपराओं के साथ छेड़छाड़ आखिर क्यों? आजकल ये चलन सा बनता जा रहा है कि सनातन धर्म का मजाक बनाओ। देवी देवताओं के ऑब्जेक्शनेबल पोस्टर बनाओ। हद भाषा में बोलता हुआ दिखाओ। आखिर किसने अधिकार दे दिया कि कोई हमारी धार्मिक आस्था से छेड़छाड़ करे? ये हमारी भावनाओं को ठेस पहुँचाए? कुछ फ़िल्म मेकर्स। कुछ राइटर्स, कुछ पेंटर्स, कुछ ऐक्टर्स, कुछ ऐडवर्टाइजर्स को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। की वो क्रियेटिव लिबर्टी के नाम पर धर्म का मजाक ना बनाये। और ना ही किसी की मान्यता या परंपरा को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करें। दोस्तों यह। यह किसी राजनीतिक पार्टी या धर्म के लिए नहीं। बल्कि पूरे देश के लिए। एक स्वाभिमान बढ़ाने वाली बात है। कि आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और कुशल मार्गदर्शन में देश के कोने कोने में सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरो को पुनः पहचान मिल रही है। स्थान स्थान पर कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। जिनसे हमारी इन धरोहरें की रक्षा भी हो रही। उनका पूरा निर्माण भी हो रहा है। साथ ही। उनकी मौलिकता भी यथावत रखी जा रही है। मोदी जी, ये देश सदैव आपका रहेगा। मेरा अनुरोध है आप सबसे। क्या आप से पूरी सक्रियता और जागरूकता के साथ अपनी अमूल्य सांस्कृतिक, धार्मिक मान्यताओं और धरोहरो को सहेजकर रखने का संकल्प करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें l 

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