कनतारा गुजराती फिल्म ने के जी एफ फिल्म को हरा दिया

 


हमेशा फिल्मों को जज किया जाता है। उनके कलेक्शन के बेसिस पे 100,200 करोड़ 500 करोड़ लेकिन 10 सालों में एक बार एक ऐसी फ़िल्म रिलीज होती हैं जो सिनेमा का एक्सपिरियंस में बदल देती है। कांता राईज़ अली इंडिया की हिस्टरी में बनने वाली वन ऑफ द बेस्ट क्लासिक मास्टरपीस फ़िल्म का रिव्यु मैंने अपने चैनल पे 1 ऑक्टोबर को डाला था और आपसे प्रॉमिस भी किया था। शायद 90% लोग इसका नाम पहली बार सुन रहे हैं, लेकिन यह आखिरी बार बिल्कुल नहीं होगा। मैं ऐसा होने ही नहीं दूंगी और अब देखिये उनका सॉलिड कॉन्टेन्ट प्लस पब्लिक कालवन सपोर्ट फ़िल्म आपकी तरह पूरे देश में फैल चुकी है। कांतरा का सबसे बड़ा अचीवमेंट क्या है आप जानते हो? इसने लैंग्वेज बैरियर जो हमारी कंट्री में सिनेमा का सबसे बड़ा विलेन है। उसको डिफीट कर दिया है, जिसको कनाडा नहीं भी आती। वो भी फ़िल्म को थिएटर में जाके एक बार एक्सपिरियंस करना चाहता है और अब तो फ़िल्म हिंदी डबिंग के साथ रिलीज भी होने जा रही है। वैसे कन्नड़ा इंडस्ट्री के बारे में सोचते ही केजीएफ का फोटो बड़ा बड़ा आँखों के सामने घूमने लगता है। बस यहीं से मेरे दिमाग में इस वीडियो को बनाने का आइडिया आया स्पेशल ली। वो ऑडियंस ज़रा ध्यान से सुनें जिसने केजीएफ को एक सेंसेशन बना दिया। अब कान तारा के लिए भी वही सेम टु सेम काम करना होगा। आपको दोस्त जीस लेवल की यह फ़िल्म है। हमें इसको अंडररेटेड वाली कैटगरी में नहीं जाने देना है। इसको वो रिस्पेक्ट प्लस कलेक्शन मिलना चाहिए जो ये डिज़र्व करती है। पांच पॉइंट्स बता दूंगी आपको आज वीडियो में तो ये साबित करेंगे कि कांतरा का एक्सपीरियंस केजीएफ से भी एक स्टेप ऊपर नेक्स्ट लेवल का है। बजट फैक्टर बॉस केजीएफ चैपटर टू की आंधी में बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड जुड़ गए। रॉकी भाई ने लिटरल्ली पूरी दुनिया को अपनी टेरिटरी बना दिया। वहाँ से उनका बजेट 100 करोड  को क्रॉस कर जाता है। लेकिन क्या आप यकीन करोगे अगर मैं आपको बताऊँ कान तारा सिर्फ और सिर्फ 150 करोड  के बजट में बनाई गई फ़िल्म है और अभी तक 400 करोड  का कलेक्शन कर के प्रॉफिट में पहुँच चुकी है। हेन्स प्रूव्ड क्वालिटी सिनेमा के लिए बड़े बड़े सेट्स, फेमस सरनेम वाले ऐक्टर्स या फिर पीआर ऐंड प्रमोशन कुछ भी मैटर नहीं करते। ओनली कॉन्टेंट इस द किंग स्टोरी टेलिंग केजीएफ फिक्शनल दुनिया क्रिएट करती है जिसके सेंटर पे मॉन्स्टर को रख के अन्डरवर्ल्ड को एक्स्प्लोर किया जाता है। कहानी बिल्कुल भी कॉम्प्लेक्स या फिर समझने में मुश्किल टाइप की नहीं है, लेकिन उसको प्रेज़ेंट करने का तरीका आउट ऑफ डिस वर्ल्ड जबकि कान तारा की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ इसकी स्टोरी में छुपी है, जिसका डायरेक्ट कनेक्शन रियल वर्ल्ड के साथ जुड़ा हुआ है। फ़िल्म को समझने के लिए आपका दिमाग चलाना पड़ेगा फुल स्पीड से क्योंकि एक बड़ी कहानी के अंदर छोटी छोटी तीन चार कहानियाँ साथ साथ चलती है। चैलेंजिंग काम लेकिन रिज़ल्ट इम्प्रेसिव क्लाइमैक्स। मैजिक नो डाउट केजीएफ चैपटर वन के बाद चैपटर टू के लिए सिनेमा लवर्स का एक्साइटमेंट अलग ही लेवल का था। नो कॉम्पिटिशन प्लस प्रशांत नीले फ़िल्म को जीस लेवल पर जाकर खत्म किया। हर कोई लिटरल्ली पागल हो या पार्ट थ्री के लिए हिट छोड़ना सबसे स्मार्ट मूव निकला। बट ट्रस्ट मी कांता का क्लाइमैक्स इस अनबिलीवेबल हॉलीवुड बॉलीवुड दोनों एक साथ मिल कर भी उसे कंप्लीट नहीं कर सकते। वहा पे ऋषभ शेट्टी, इस डाइरेक्टर वर्सिस ऋषभ शेट्टी, ऐक्टर दोनों में से किसकी तारीफ ज्यादा करनी चाहिए? आप लिटरल्ली कन्फ्यूज़ हो जाओगे, कैमरा वर्क इन क्लाइमैक्स सीन दिमाग सच में टुकड़े टुकड़े हो जायेगा। हिप्नोटाइज करने वाला म्यूसिक इनके बैकग्राउंड पूरे दिन बात कर सकती हूँ। मैं इस बारे में मास वर्सिस क्लास केजीएफ जैसा माँ से एक्सपिरियंस थिएटर के अंदर क्रिएट कर पाना अभी पूरे बॉलीवुड का सपना बन चुका है। हर कोई केजीएफ बनना चाहता है। एक्चुअली रॉकी भाई वर्सिस अधीरा के फाइट सिक्वेंस एकदम ग्राउंड लेवल के है। प्लस एंट्री हो या फिर समंदर के अंदर एग्ज़िट प्रशांत नील इसके मास्टर ऑफ मास एस बट कांताराम आस फैक्टर में केजीएफ को मैच करने की कोशिश नहीं करती। वो क्लास के रास्ते घुस के गॉड वर्सिस ईवल का ऐंगल सुनकर अपने कॉन्सेप्ट से केजीएफ को बीट करती है। ऐक्शन सिक्वेंस केजीएफ जैसे नहीं हैं, लेकिन डिफरेंट स्टाइल में प्रेसेंट किए गए हैं। 100% रॉ, इमोशनल और एक्स फैक्टर डेमी गॉड वाले सीन्स जिसमें क्लास ऐड करते हैं, फिक्शन वर्सिस रिऐलिटी केजीएफ का सेटअप है। फिक्शनल बोले तो रिस्पॉन्सिबिलिटी कम। आप को जज नहीं किया जाएगा। हिस्टरी कितनी ऐक्युरट है या नहीं, सही या गलत वो फैक्टर हट जाता है। कोई असली इंसान नहीं है वहाँ पे जीसको आप दिमाग में याद करके फ़िल्म वर्सिस रिऐलिटी को कंपेर करने लग जाओ। इसीलिए केजीएफ का काम आसान है। बट कांतरा के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है की लोग थिएटर्स के अंदर अपनी हिस्टरी एंड बिलीव्स को जी रहे हैं। अगर कुछ भी इधर उधर हुआ तो सीधा कॉन्ट्रोवर्सी ऐंड बॉयकॉट लेकिन कान तरह की ऐक्युरेसी 100% है। सिर्फ तालियान, उँगलियाँ ऐंड यकीन करिए मेरा स्पेसिअलली वो सीन्स जो कल्चर के साथ कनेक्टेड है, वहाँ सिर्फ और सिर्फ गूसबम्प्स फील होंगे। आपको जब थिएटर में बैठा हर एक इंसान अपनी बॉडी के थ्रू एनर्जी फील करने लग जाये, बहुत सिनेमा एक्सपीरियंस बन जाता है। अन्फॉर्गेटेबल सुन लिया, मज़ा आया अब बारी आप लोगों की है डिसअप्पोइंट मत कर ना यार प्लीज़ टेल मत होने देना वरना इंडियन सिनेमा सिर्फ हीरोपंती बन के रह जाएगा। एक बार केजीएफ को सर पे बिठा कर देखा तो पार्ट टू में क्या धमाका वापस निकला। इस बार अपनी फीलिंग्स को कांतरा में इन्वेस्ट करके देखो आई प्रॉमिस यू थिएटर से बाहर इंडिया की नंबर वन फ़िल्म वाला एक्सपीरियंस लेकर निकलोगे। 

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