3 अक्टूबर 2022 की तारीख थी। एक व्यक्ति थाने पहुंचता है। थाने पहुँचकर ये व्यक्ति डरा हुआ सहमा हुआ थाने में पहुंचता है और पुलिस को जानकारी देता है कि दरअसल उसकी पत्नी जो तीन महीने पहले मायके गई थी, जिससे लगातार उसकी बात हो रही थी। वो अब अपने मायके में मौजूद नहीं है। मायके वालों को भी कोई जानकारी नहीं है और पता नहीं कि उसकी पत्नी कहाँ पर है। उसकी पत्नी गुमशुदा हो गयी है। उसे डर है किसी अनहोनी का दरअसल, फिरोज़ाबाद के शिकोहाबाद के गांव दिखतौली का रहने वाला यह व्यक्ति था। शिकोहाबाद थाने में ये पहुंचा था जहाँ पर उसने शिकायत दी थी। इसका नाम हरीबाबू है और उसकी पत्नी का नाम कल्पना है। 10 साल पहले इस दंपति की शादी हुई थी। इनके दो प्यारे बच्चे थे, बच्चे हैं। इसके बाद इसकी पत्नी दरअसल तीन महीने पहले अक्टूबर 2022 से तीन महीने पहले अपने घर से निकली थी। इस पति के घर से ससुराल से और मायके के लिए निकली थी। मायका इसका कोलकाता में था। इसकी पत्नी से इसकी लगातार बाद भी हो रही थी, लेकिन अब कुछ दिनों से बात नहीं हो रही थी तो इसे गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ी। इससे पुलिस को सूचना देनी पड़ी। अब 3 अक्टूबर के बाद 10 अक्टूबर की तारीख आ चुकी थी। 10 अक्टूबर को इसकी पत्नी का इस पति के पास फ़ोन आया। कल्पना का हरी के पास फ़ोन आया और उसने कहा कि दरअसल वो आग्रा में मौजूद है। उसे बहला फुसलाकर एक व्यक्ति ले गया और उसने बंधक बना लिया है और पति आए और उस पत्नी को बचा ले क्योंकि वो बहुत बड़ी मुश्किल में है। पति ये सुनकर डर जाता है, घबरा जाता है। तुरंत दौड़कर पुलिस के पास जाता है और इस बात की जानकारी देता है अब क्योंकि किसी की पत्नी को बंधक बनाया हुआ था। पुलिस भी तुरंत एक्शन मूड में आती है और इस उत्तर प्रदेश के आग्रा के ताजगंज थाना के इस संजीव दीक्षित के घर पहुँच जाती है और क्योंकि इस जानकारी पत्नी ने दी थी, पति को जब पुलिस यहाँ पहुंचती है तो उस पत्नी को यहीं से बरामद करती है। संजीव दीक्षित को भी हिरासत में लेती है। इसके अलावा एक महिला और एक व्यक्ति और था जिसको थाने लाया जाता है। यहाँ संजीव से पूछ्ताछ की जाती है कि आखिर उसने इस पत्नी को क्यों बंधक बनाया? क्यों बहला फुसलाकर ले गया किसी और की पत्नी को? लेकिन संजीव ने जो कहानी बताई वाकई वो हैरान करने वाली थी। संजीव बोला की दरअसल कल्पना वो तो किसी कल्पना को जानता ही नहीं है और ये जो महिला सामने खड़ी है इसका नाम आरती उपाध्याय है। इसके दो भाई है जो कि छोटे है। इसकी एक बहन है संगीता उपाध्याय और इसने तो कल्पना उपाध्याय से तीन महीने पहले शादी की है। संजीव एक एक कर शादी के सारे सबूत दिखाता है, फोटो दिखाता है, विडिओ दिखाता है, कॉन्ट्रैक्ट दिखाता है कागजात जाता है। इस बात को देखकर वाकई पुलिस हैरान थी कि जीस महिला के लिए एक व्यक्ति एक पति सामने खड़ा यूं कह रहा है कि उसकी पत्नी लापता हो गई है, गुमशुदा है, किसी ने बंधक बना रखा है तो दूसरा पति सबूत दिखा रहा है और कह रहा है कि तीन महीने पहले उसकी शादी हुई है। अब दो थ्योरी थी, दो पति थे, एक व्यक्ति एक महिला थी और उसके कुछ दोस्त थे। बोले उसको मामला समझ नहीं आ रहा था। उधर दोनों पति भी हैरान थे। अब पुलिस ने इनको हिरासत में लिया। इस महिला को कल्पना उर्फ इस आरती उपाध्याय को इसकी दोस्त को इस एक अन्य व्यक्ति जिसका नाम गोपाल है उसको इन दोनों पतियों को भी बैठाया और उसके बाद इनसे सादा पूछ्ताछ की गई और पूछा कि आखिर यह मामला क्या है? क्योंकि इस बात का जवाब सिर्फ ये आती दे सकती थी। उपाध्याय और कल्पना दे सकती थी। दरअसल इस पत्नी ने बताया कि इसकी शादी 10 साल पहले हुई थी। इस हरि के साथ हुई थी। कल्पना की इसका असली ना कल्पना ही है और ये कुछ महीने पहले कुछ साल पहले से ही। लेकिन इनके घर में आर्थिक तंगी शुरू हो गई थी। ससुराल में भी मायके में भी काफी दिनों से यहाँ आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। परेशान थीं। इसके बाद कुछ साल पहले ही इसकी मुलाकात हुई। एक दोस्त से मालती ना घर से जो की निवासी है। नई आबादी रहता रहना उत्तर की और गोपाल से जो की निवासी है शेरपुर भूरा का यानी कल्पना की दोस्ती मालती और गोपाल से हुई और मालती और गोपाल और कल्पना ने मिलकर एक व्यक्ति और था। मनोज। इन सबने मिलकर एक प्लैन बनाया जिससे इनकी आर्थिक तंगी को दूर किया जाना था। इस प्लेन का मुख्य केंद्र थी कल्पना। दरअसल यह कल्पना और अब इसकी ये दो स्मॉल थी और यह गोपाल अपने इस कल्पना के दो बेटों को इस कल्पना का छोटा भाई बनाते थे। कल्पना सबसे पहले कल्पना दुल्हन बनती थीं। इसके अलावा इसके जो दो बेटे थे वो छोटे भाई बनते थे। इसकी जो दोस्त मालती थी वो बहन बनती थी। गोपाल दूर का रिश्तेदार और मनोज तीसरा रिश्तेदार बनता था। इसके बाद सबसे पहले ये तीनों मुख्य तौर पर ये तीनों कल्पना और ये गोपाल और ये इसकी दोस्त माल थी। क्योंकि बच्चे अभी छोटे है तो ये तीनों मिलकर एक ऐसे शिकार की तलाश करते थे जो कि एक कुंवारा लड़का होता था। एक ऐसा कुंवारा लड़का जो शादी के लिए बेताब होता जिसे लड़की नहीं मिल रही होती जिससे शादी करनी होती है और सबसे मुख्य तौर पर वो पैसे वाला होता। ये महिला अपने घर से मायके के लिए कह कर निकलती और मायके के लिए कहकर जब वो तीन चार महीने के लिए निकलती है और कहती की वो मायके जा रही है। लेकिन वो मायके नहीं जाती थी। इसके बाद जब इन्हें शिकार मिल जाता तो ये उससे शादी करते। शादी करने के बाद आगे का खेल रामा शुरू हो जाता जो कि संजीव के साथ हुआ। दरअसल सबसे पहले तीन महीने पहले कल्पना यहाँ से निकली। इसके बाद संजीव जो कि आग्रा का रहने वाला है, इससे मुलाकात हुई। इससे शादी हुई। शादी के बाद इसमें ₹1,60,000 शादी के दौरान ही ₹1,60,000 कल्पना से शादी के खर्चे के तौर पर संजीव से ली। यहाँ तक मामला हमेशा ठीक चलता था। लेकिन इसके बाद शादी में जान बूझकर कल्पना अपने नए पति से झगड़ा मोल लिया करती और चीजों को बिगाड़ने की कोशिश करती। उसके बाद शादी तोड़ने का दबाव दिया जाता है। कुछ महीने के अंदर ही फिर से पैसे ऐंठे जाते। दहेज प्रताड़ना और अन्य चीजों का मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी जाती, जो संजीव के साथ भी हुआ और इसके बाद ऐसे ही संजीव से ₹1,60,000 लेने के बाद ₹1,00,000 और की डिमांड की जा रही थी और धमकी दी जा रही थी की अगर नहीं दिए गए तो दहेज प्रताड़ना का मुकदमा किया जाएगा। इन दोनों ने इस कल्पना ने इसकी दोस्त मालती ने फर्जी आधार कार्ड बना रखे थे। कल्पना ने आरती बाध्य के नाम से और दोस्त संगीता उपाध्याय के नाम से और अक्सर यह कई बार यह भी कोशिश करती है कि रात में जेवर और पैसे लेकर फरार हुआ जाए। पुलिस ने फिर पूछा कि इस बार ऐसा क्या हुआ जो पति को फ़ोन करना पड़ा? पुलिस की मदद लेनी पड़ी। उसने बताया कि इस बार संजीव से शादी हुई ₹1,60,000 लिए ₹1,00,000 और डिमांड किए जा रहे थे। ये जानकारी संजीव ने अपने परिचितों को भी दी थी, लेकिन पुलिस में कोई खबर नहीं की थी क्योंकि उसे बदनामी का डर था। लेकिन फिर भी वो पुलिस के पास गया।
