उनकी अपनी अलग स्टाइल में सवाल सिंपल है। मौत के लिए जिंदगी बनी है या फिर जिंदगी के लिए? मौत? अरे भाई कही आप भी इस गोल चक्कर में तो नहीं फंस गए? मेरे को बहुत गुड्बाइ एक फील गुड फ़िल्म है। कुछ ऐक्शन जैक्सन या फिर रोमैंस पे चान्स का मौका नहीं मिलेगा। इसके अंदर फ़िल्म का सब्जेक्ट बहुत सेंसिटिव है, जिसके साथ अलग अलग ऑडियंस अलग अलग तरीके से कनेक्ट करेगी। कुछ को बहुत अच्छी लगे गी तो किसी को टाइम वेस्ट हमेशा हम लोग तो उनको आइक्यू से जज करते है। दिमाग का सैटिस्फैक्शन इस फ़िल्म का लेना देना सिर्फ एक यू से है इमोशनल क्वेश्चन आपकी फीलिंग्स जिनको इस फ़िल्म के मेकर्स ने टारगेट किया है। सब्जेक्ट तो है ही काफी यूनिक लेकिन उसको दिखाने का तरीका और ज्यादा मस्त है जबकि वो सबसे मुश्किल चैलेंज था। बहुत साहब खुद सोचो, किसी की मौत के अराउंड ट्रैजिडी नहीं कॉमेडी ढूंढ निकालना ये काम बिल्कुल आसान नहीं है। एक छोटी सी गलती और फ़िल्म बर्बाद हो जाएगी। वैसे अभी तक मेरी बातें सुनकर और अमिताभ सर को इस फ़िल्म के पोस्टर पर देखकर आपके दिमाग में पीकू का नाम ऑलरेडी एक बार घूम चुका होगा, है ना? नहीं जी ये फ़िल्म उससे काफी अलग है। वो एक जर्नी फ़िल्म है। मंजिल जरूरी नहीं होती। छोटे लंबे रास्ते में खुशियां छुपी होती है। यहाँ गुड्बाइ का मैसेज है जिंदगी इक्वल्स टू कहानियाँ इंसान चला जायेगा। सिर्फ उसकी कहानियाँ बचेंगी और आखिरी कहानी की एंडिंग वो खुद नहीं, उसकी फैमिली लिखेगी। क्या लिखोगे? कैसे लिखोगे? वो फैसला आपका गुड बाइ आपका टेस्ट लेगी, इमोशन्स में ना चाहते हुए भी कहीं कहीं पे हँसी निकल जाएगी। सिचुएशन्स में कॉमेडी को छुपाया गया है तो फिर उनका म्यूजिक अमित त्रिवेदी से जूनियस इन्होंने इस बार जिम्मेदारी ली है। आपको सेंटी करने की सीन्स के बीच में डाले गए टोंस हो या फिर खुद महाकाल के साथ जुड़े हुए गानों के लिरिक्स, सब कुछ साथ में मिलकर आपकी आँखों को गीला कर सकता है तो फिर दिक्कत कहाँ है? सोचो एग्ज़ैम में 10 नंबर का क्वेश्चन आता है और आप सिर्फ एक लाइन लिखकर वापस आओगे तो कितने नंबर मिलेंगे? वैसे ही इस फ़िल्म के अंदर 1015 टॉपिक को हाइलाइट किया गया, लेकिन उसको एक्सप्लेन नहीं किया। जीस वजह से कॉन्टेक्ट करें। विन्स और सैटिस्फाइड नहीं कर पाया। अब मैं खुद को रोक नहीं पा रही हूँ। नीना गुप्ता की तारीफ करने से मतलब आप यकीन करेंगे जिसमें उनके अंदर युद्ध की नेशनल क्रश कही जाने वाली रश्मि का मौजूद हो। उनको भी अगर नीना गुप्ता अपनी शैडो के पीछे छुपने को मजबूर कर दे, इसको बोलते हैं कमाल का स्क्रीन प्रेज़ेंस स्पेशल ली अमिताभ सर के साथ नी नाम की केमिस्ट्री इस फाइर ये सो कॉल्ड पर्फेक्ट बॉलीवुड कपल्स में वो चीज़ आपको फील नहीं होगी जो इस जोड़ी ने सिर्फ कुछ सीन्स में मैजिक क्रिएट कर दिया। इन शोर्ट काफी लंबे टाइम बाद बॉलीवुड से एक ऐसी फ़िल्म निकली है जीसको विथ फैमिली पूरे परिवार के साथ आप एन्जॉय करिए, थिएटर्स में जाके मेरी तरफ से गुड्बाइ को मिलेंगे। पांच में से चार स्टार्स, पहला तो काफी रिफ्रेशिंग और डिफरेंट कॉन्सेप्ट। दूसरा नीना गुप्ता का मैजिकल प्रेज़ेंस अमिताभ सर का सॉलिड परफॉरमेंस और सुनील ग्रोवर का इंट्रेस्टिंग तीसरा फॉर म्यूजिक अमित त्रिवेदी आपके दिल दिमाग दोनों को ही कर लेंगे। नेगेटिव में पहला तो डीप सब्जेक्ट लेकिन इन्कम्प्लीट नॉट सो मच। इम्पैक्ट वाला प्रेजेंटेशन दूसरा रश्मिका आज लीड उतना कमाल नहीं कर पाई हिंदी ऐक्सेंट इस गडबड अभी बहुत कुछ सीखना है प्लस उनकी राइटिंग इतनी स्ट्रांग नहीं है, जबकि इसमें स्कोप था पांच छे अच्छे और लंबे डायलॉग लिखने का चान्स मिस्ड।
