Reporter by - प्रिया मगरराती
कोयल की आवाज की तारीफ बहुत सुनी होगी आपने आज तक, लेकिन एक अजीब सी बात बताऊँ जीसको सुनने के बाद शायद अगर ये कोई इंसान होती तो आप इसको जेल में डाल देती। कोर्ट में 100, 200 केस भी चल रहे होते। कोयल कभी अपना खुद का घोसला नहीं बनाती। वह हमेशा अपना अंडा किसी दूसरी चिड़िया के घोंसलें में डाल देती है। वो भी तब जब वो चिड़ियाँ खाना ढूंढने गई होती है। अपने असली बच्चों के लिए और सुनिए जैसे ही कोयल का बच्चा अंडे से बाहर निकलता है ना ये बाकी अंडों को एक के बाद एक धक्का मारकर नीचे फेंक देता है ताकि उसका सर्वाइवल आसान हो जाए।
अब मैंने आपको ये अजीब सी कहानी क्यों सुनाई यही सोच रहे हो क्योंकि बॉस बॉलीवुड जाग गया है और इसको वाले कॉन्सेप्ट खतरनाक फ़िल्म आई है। कला फ़िल्म का नाम जितना क्यूट, छोटा और मामूली लगता है, इसका कॉन्सेप्ट उतना ही डरावना, भयानक लेकिन स्पेशल टाइप का है। कहानी एक मशहूर सिंगर की है जो फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी आवाज का जादू चला रही है। डायरेक्ट देश की प्रधानमंत्री को अपना फैन बना चुकी है। पेपर में फोटो भी आया है, लेकिन पूरी दुनिया में एक ऐसा इंसान भी हैं जो सिंगर साहिबा की आवाज़ को बिलकुल पसंद नहीं करता। उल्टा इतनी ज्यादा नफरत की फ़ोन पे हैलो तक नहीं सुनना चाहता।
ये इंसान कोई और नहीं इनकी अपनी माता जी हैं जो ऐक्चुअली खुद अपने जमाने की मशहूर सिंगर रह चुकी हैं। अब जिंदगी यूं ही खट्टी मीठी बातों में आसानी से गुजर जाती है। अगर एक भूत इस कहानी में एंट्री नाम आता ऐक्चूअली ये भूत कोई और न तो वो टूटा हुआ अंडा है जीसको कोयल साहेबा ने घोंसलें से नीचे धक्का मार दिया, बट उसकी आत्मा बदला लेना चाहती है। जानते हो कैसे? बदले में खुद कोयल को जान से मार के वो भी अपने ही हाथों से जान लेने को मजबूर कर देना देखो दोस्त कला उन रेयर फिल्मों में से है जो कभी 510 साल में बड़ी मुश्किल से बॉलीवुड में देखने को मिलती है।
2 घंटे की फ़िल्म में गिनती की दो शिकायत ढूंढे नहीं निकल पाओगे आप इतनी बारीकी से उसको तैयार किया गया है। सबसे बड़ी खासियत क्या है इसकी जानते हो? फ़िल्म सिर्फ एक कैटेगरी के लिए नहीं बनी है। हॉरर सस्पेंस थ्रिलर मिस्ट्री जोड़ना चाहते हो वो मिल जाएगा। इस उनकी कहानी में हर जोनर में फिट हो जाती है।
सच सच बताना आपने कभी सोचा है की किसी फ़िल्म का म्यूजिक आपको भूत वगैरह से ज्यादा जा सकता है? अगर जवाब ना हो तो एक बार कला को मौका जरूर दीजिये। म्यूज़िकल हॉरर जी हाँ, एक अलग तरीके का एक्सपेरिमेंट है ये, जिसमें डर तो लगेगा लेकिन अच्छा सिनेमा देखने का सैटिस्फैक्शन बहुत ज़ोर से मिलेगा। अमित त्रिवेदी के जीनियस इनके लिए मेरे पास अब बचे नहीं है। म्यूसिक से हंसाना रुलाना तो सब करते है। ये बंदा डरा रहा है, धमकी दे रहा है सर अब कॉन्सेप्ट देखो मैंने आपको बता दिया वो कोयल की अजीब सी कहानी पर बेस्ड है।
जीसको सुनकर ही काफी मज़ा आया होगा, है ना? सोचो उसके पीछे कश्मीर की बर्फ़ वाला बैकग्राउंड डाल दिया जाए और आँखों को वश में करने वाली हिप्नोटाइज सिनेमैटोग्राफी इन शोर्ट आँखों को स्वर्ग मिले वाला है। समझ लीजिये और आपके दिमाग का ख्याल रखने के लिए चालक कहानी भी छुपी बैठिये। फ़िल्म के अंदर एक दम अनप्रेडिक्टेबल स्टोरी लाइन क्योंकि ऐसा कुछ पहले देखा ही नहीं है। आपने अगले सीन में क्या होगा? कैसे होगा कहानी कहाँ पे खत्म होगी, ज़ीरो आइडिया इंतज़ार करो, सरप्राइज़ हो जाओ और फिर क्लाइमेक्स में जाके रियलाइज होता है की ये जो 2 घंटे हमने देखा वो एक्चुअली कुछ और नहीं।
हम सब की अपनी कहानी थी, जो बचपन से हमारे आसपास होता रहा है। मेल फीमेल डिस्क्रिमिनेशन कोई नई बात नहीं है। 50 साल पहले था, 50 साल बाद भी चलेगा लेकिन उसको ऐसे भूतिया तरीके से प्रेज़ेंट करना। डाइरेक्टर मैडम अन्विता दत्त की स्मार्टनेस और वो गेट सम टाइम दोनों चीजें इस्टैब्लिश करता है और उनका सबसे बड़ा हथियार है इस फ़िल्म की कास्टिंग क्या ऐक्टर्स चुने हैं? बहुत फ़िल्म से बाहर से नहीं, अंदर से भी स्पेशल है। तृप्ति लीड में है ऐंड हर सीन में आप सिर्फ इनके आगे सर झुका सकते हो।
एक्टिंग छोड़ो बंदी ने कला के कैरेक्टर को जिंदा कर दिया है। म्यूजिशियन की जिंदगी जीना वो भी 7080 साल पीछे जाके। इस टास्क में 99% एक्ट्रेस ओवर एक्टिंग में फंस जाती है। बुरी तरह बट तृप्ति के चेहरे पर आप इस पूरी फ़िल्म की कहानी पढ़ सकते हो। एक्स्प्रेशन्स के थ्रू हर एक इमोशन को बाहर लाना, प्यार, नफरत, गुस्सा, डर सब कुछ मिलेगा। ये बंदा लंबी रेस का घोड़ा है, लिख के रख लीजिये आप मेरी इस बात को यहाँ पे लीड नहीं है। वो सपोर्टिंग है लेकिन फ़िल्म उनके बिना अधूरी है कॉन्टेंट।
इसके किंग इरफान साहब इसे स्टेटमेंट के चैंपियन हैं। काबिल उसी रास्ते पर चलने वाले हैं। ये फ़िल्म उस का सबसे बड़ा सबूत है। बॉस स्वस्तिका मुखर्जी बहुत अंडर रेटेड है। बंगाली कल्चर को अपने साथ लेकर आती है। ये वो बोनस बन जाता है। किसी भी फ़िल्म के लिए यहाँ भी वो फ़िल्म में जिम्मेदार है। आपके दिमाग के अंदर बहुत सारे थॉट्स को बाहर निकालने के लिए इग्नोर नहीं कर पाओगे। एक सेकंड के लिए भी तो बॉस मेरी तरफ से कला को मिलेंगे।
पांच में से चार स्टार्स, पहला तो ये साइकोलॉजिकल थ्रिलर हॉरर वाला कॉन्सेप्ट दिमाग का डर दूसरा सिनेमाटोग्राफी बॉस। विजुअल्स में ये 2022 की वन ऑफ द बेस्ट फ़िल्म है। अंडा ऑउटेड ली तीसरा डायरेक्शन एक तरफ कहानी में लोगों को फंसाकर फ़िल्म को चलाना और पीछे से रिअल लाइफ वाला मैसेज भी समझाना क्लिअर ब्रिल्लीएंट नॉन सेन्स फ़िल्म मेकिंग, चौथा एक्टिंग पर्फॉर्मन्सेस जिसपे नजर डालोगे? उधर स्ट्रांग एक्स्प्रेशन इमोशन, डेडिकेशन और टैलेंट चारों चीजें दिखाई देंगी।
नेगेटिव में कहानी के अंदर थोड़ा और डिटेल्स ऐड होती ना तो जो ऊपर ऊपर से फ़िल्म देख रहे हैं, ज़्यादा डीप। इसके मैसेज से रिलेट ना करके उनको ज्यादा इंटरटेनमेन्ट मिलता जैसे कि बाबुल वाला जो कैरेक्टर है उसको कम यूज़ किया गया। स्वास्तिका की कहानी पब्लिक इमैजिनेशन पर छोड़ दी। थोड़ा डिटेल्स बनता था। आधे घंटे फ़िल्म और लंबी होनी चाहिए। यदि मेरे हिसाब से ये सब छोटी मोटी चीज़े है आप फ़िल्म देखो बिना किसी डाउट के वादा है मेरा इंडियन सिनेमा के लिए रिस्पेक्ट नेक्स्ट लेवल पे पहुँच जाएगी।
