भारतीय
जनता पार्टी से जुड़े सामाजिक
और राष्ट्रहित के कार्यों में
सक्रिय सुनील खुरचन जी आज किसी परिचय
के मोहताज नहीं हैं। राजनीति हो या समाजसेवा—हर
क्षेत्र में उनका नाम सम्मान के साथ लिया
जाता है। कहा जाता है कि “खुरचन कहे भी जाएँ तो
लोग मिलने आ जाते हैं”, क्योंकि
उनकी पहचान केवल पद से नहीं,
बल्कि उनके कार्यों से बनी है।
बीजेपी से जुड़े बड़े-बड़े नेता हों या सामाजिक संगठनों
के प्रतिनिधि—सुनील खुरचन जी को लोग चेहरे से भी और
नाम से भी पहचानते
हैं। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली है कि पहली
मुलाकात में ही वे लोगों
पर अपनी अलग छाप छोड़ देते हैं। सुनील खुरचन जी स्वयं कहते
हैं—आज 30 वर्षों से समाज सेवा,
पार्टी सेवा, देशहित और समाजहित में
लगातार काम कर रहा हूँ।
मेरा उद्देश्य कभी लालच या स्वार्थ नहीं
रहा। मैं केवल सेवा के भाव से
काम करता हूँ।”
उनका
सपना है कि वे
चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह
जैसे महान देशभक्तों की तरह समाज
में एक प्रेरणादायक पहचान
बनाएं। उनका मानना है कि यदि
मनुष्य रूप में जन्म लिया है,
तो लोगों की
सेवा करना ही सबसे बड़ी
उपलब्धि और सच्चा जीवन
है। सुनील खुरचन जी की एक
विशेष पहचान यह भी है
कि वे लोगों को
उनके भविष्य के बारे में
मार्गदर्शन देते हैं—आने वाला समय अच्छा होगा या चुनौतीपूर्ण,
इस
पर वे अपनी अनुभवी
दृष्टि से लोगों को
सचेत करते हैं। यही कारण है कि समाज
के हर वर्ग के
लोग उनसे जुड़ना चाहते हैं। समाज
में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुनील
खुरचन जी को कई
प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान मिल
चुके हैं। वे अनेक महत्वपूर्ण
सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाओं
में सक्रिय रूप से शामिल रहे
हैं। बाबरी मस्जिद आंदोलन के दौरान भी
उनकी उपस्थिति और भूमिका की
चर्चा आज तक होती
है। वर्तमान
में वे नेपाल-भारत
मैत्री संगठन से जुड़े एक
प्रतिष्ठित संगठन के दिल्ली-एनसीआर
अध्यक्ष के रूप में
भी कार्यरत हैं और दोनों देशों
के सामाजिक संबंधों को मज़बूत करने
में योगदान दे रहे हैं।सुनील
खुरचन जी खुद को
सिर्फ “
सोशल वर्कर या
“
समाज सेवक” कहना पसंद करते हैं। अस्पतालों में मरीजों की मदद,
गरीबों
के लिए भोजन और नाश्ते की
व्यवस्था,
आपात परिस्थितियों में सहयोग—उनके कार्यों की सूची लंबी
है। उनके अनुसार,
वे अब तक
सैकड़ों नहीं बल्कि हजार से अधिक लोगों
की किसी न किसी रूप
में मदद कर चुके हैं,
जिनमें अकेले हाल के वर्षों में
करीब 200
से अधिक जरूरतमंद
लोग शामिल हैं। सुनील
खुरचन जी केवल एक
समर्पित समाजसेवक ही नहीं, बल्कि
एक सफल बिज़नेस मैन भी हैं। खास
बात यह है कि
वे अपनी कमाई का लगभग 10 प्रतिशत
हिस्सा पूरी तरह समाज सेवा में समर्पित करते हैं। उनकी यह सेवा केवल
शब्दों तक सीमित नहीं
है, बल्कि ज़मीन पर दिखाई देती
है। वे ज़रूरतमंद लड़कियों
की शादी, गरीब बच्चों की पढ़ाई के
लिए किताबें, बीमार लोगों के लिए दवाइयाँ,
और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों
के बच्चों को स्कूल ड्रेस
व आवश्यक सामग्री दान करते हैं। सुनील जी का मानना
है कि व्यापार तभी
सार्थक है जब उसकी
कमाई समाज के आख़िरी व्यक्ति
तक पहुँचे। यही सोच उन्हें एक संवेदनशील इंसान,
ज़िम्मेदार बिज़नेस मैन और सच्चा समाजसेवक
बनाती है। उनकी सामाजिक सक्रियता का दायरा राष्ट्रीय
स्तर तक फैला हुआ
है। सुनील खुरचन जी की भारत
के दो राष्ट्रपतियों और
प्रधानमंत्रियों से मुलाकात भी
चर्चा में रही है।उन्होंने
पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी से मुलाकात
की,
वहीं 2005
में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री,
महान कवि और राजनेता स्वर्गीय
अटल बिहारी वाजपेयी जी से भी
संवाद का अवसर प्राप्त
किया। ये मुलाकातें उनके
सामाजिक योगदान की मजबूत गवाही
हैं। सुनील खुरचन जी का जीवन
इस बात का उदाहरण है
कि बिना किसी स्वार्थ के की गई
सेवा ही सबसे बड़ा
सम्मान होती है। वे आज भी
ईश्वर से यही प्रार्थना
करते हैं कि—“भगवान मुझे ऐसा बनाए रखें कि मैं जीवन
भर लोगों के काम आ
सकूँ और समाज का
भला कर सकूँ।” निस्संदेह,
सुनील खुरचन जी आज समाजसेवा,
राष्ट्रभक्ति और मानवीय मूल्यों
का एक सशक्त नाम
बन चुके हैं। सुनील
खुरचन जी जैसे समाजसेवक
दुर्लभ होते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची
सेवा में कोई स्वार्थ नहीं होता,
सिर्फ समर्पण होता है। वे न केवल
एक नाम हैं,
बल्कि प्रेरणा के स्रोत हैं।
आने वाली पीढ़ियां उनके कार्यों से प्रेरित होंगी।