Conference of Speakers and
Presiding Officers of the Commonwealth (CSPOC) राष्ट्रमंडल
देशों के संसद अध्यक्षों
और पीठासीन अधिकारियों का एक महत्वपूर्ण
अंतरराष्ट्रीय मंच है। यह सम्मेलन हर
दो साल में आयोजित होता है और इसका
मुख्य उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना,
संसदीय संस्थाओं का विकास करना
तथा स्पीकर्स की निष्पक्षता और
निष्पक्षता को बढ़ावा देना
है।यह संगठन 1969 में कनाडा के हाउस ऑफ
कॉमन्स के तत्कालीन स्पीकर
लूसियन लामुरेक्स द्वारा शुरू किया गया था। CSPOC का कोई औपचारिक
संबंध कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) या कॉमनवेल्थ सेक्रेटेरिएट
से नहीं है, लेकिन यह संसदीय मूल्यों
पर सहयोग बढ़ाने का एक स्वतंत्र
मंच है।15 जनवरी 2026 को
नई दिल्ली में 28वें CSPOC सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने किया। यह
सम्मेलन 14 से 16 जनवरी 2026 तक संसद भवन
परिसर के संविधान सदन
(समविधान सदन) में आयोजित हो रहा है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला इस
सम्मेलन के चेयरपर्सन हैं।यह
अब तक का सबसे
बड़ा CSPOC सम्मेलन है, जिसमें 42 राष्ट्रमंडल देशों के 61 स्पीकर्स और प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स
तथा 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि शामिल
हुए हैं। कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया सहित कई प्रमुख देशों
के स्पीकर्स मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री
मोदी ने अपने उद्घाटन
भाषण में कहा कि भारत ने
विविधता को अपनी लोकतंत्र
की ताकत बनाया है। उन्होंने ग्लोबल साउथ की आवाज को
वैश्विक मंचों पर मजबूती से
उठाने पर जोर दिया।
पीएम मोदी ने बताया कि
भारत G20 अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल
साउथ की चिंताओं को
केंद्र में रखा और अब ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है
ताकि राष्ट्रमंडल और ग्लोबल साउथ
के देश समान प्रणालियां बना सकें।उन्होंने कहा, "भारत ने विविधता को
लोकतंत्र की स्थिरता, गति
और स्केल में बदल दिया है।"
इस तीन
दिवसीय
सम्मेलन
में
निम्नलिखित
महत्वपूर्ण
मुद्दों
पर
गहन
चर्चा
हो
रही
है:
-स्पीकर्स और
प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स की भूमिका मजबूत
लोकतांत्रिक संस्थाओं को बनाए रखने
में ।
-संसदीय कार्यवाही
में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग ।
-सोशल मीडिया
का सांसदों (Members of
Parliament) पर प्रभाव ।
-संसद के
बारे में जनता की समझ बढ़ाने
और मतदान से आगे नागरिक
भागीदारी की नवीन रणनीतियां।
-सांसदों और
संसदीय स्टाफ की सुरक्षा, स्वास्थ्य
और कल्याण।
-संसदीय डिप्लोमेसी,
जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और साइबर क्राइम
जैसे वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग।
यह
सम्मेलन पेपरलेस है और इसके
लिए विशेष CSPOC 2026 मोबाइल ऐप लॉन्च किया
गया है।
भारत
ने पहले भी कई बार
इस सम्मेलन की मेजबानी की
है – 1970-71, 1986 और 2010 में। 2026 में भारत की मेजबानी वसुधैव
कुटुम्बकम (पूरी दुनिया एक परिवार है)
की प्राचीन भारतीय भावना को दर्शाती है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने
सम्मेलन में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान
पर जोर दिया है।सम्मेलन के अंत में
ओम बिरला CSPOC की अध्यक्षता यूके
हाउस ऑफ कॉमन्स के
स्पीकर सर लिंडसे होयल
को सौंपेंगे।
28वां CSPOC सम्मेलन
न केवल संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने
का अवसर है, बल्कि AI, सोशल मीडिया और नागरिक भागीदारी
जैसे आधुनिक मुद्दों पर वैश्विक सहमति
बनाने का मंच भी
है। भारत की इस मेजबानी
से राष्ट्रमंडल देशों के बीच संसदीय
सहयोग और नई दिशा
मिलेगी।यह आयोजन भारत की लोकतांत्रिक यात्रा
और वैश्विक नेतृत्व को दुनिया के
सामने प्रस्तुत करता है।