दिल्ली में एक आदमी खुले जल बोर्ड के गड्ढे में गिरकर मर गया, रात भर की तलाश के बाद शव मिला

 

मृतक युवक की पहचान कमल (25 वर्ष) के रूप में हुई है, जो HDFC बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर तैनात थे। वे रोहिणी से ऑफिस से लौट रहे थे और पालम/कैलाशपुरी स्थित घर पहुंचने से महज 10-15 मिनट दूर थे। रात करीब 11:53 बजे उन्होंने अपने जुड़वां भाई से बात की और कहा कि "जल्दी घर पहुंच रहा हूं" लेकिन इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला।परिवार ने पूरी रात उन्हें ढूंढा। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने दर्जनभर पुलिस थानों के चक्कर काटे, लेकिन कहीं से ठोस मदद नहीं मिली। एक थाने से पुलिस ने कहा - "200 मीटर के एरिया में है, खुद ढूंढ लो" आखिरकार सुबह करीब 7 बजे पुलिस ने सूचना दी कि जनकपुरी में एक गड्ढे में कमल की बाइक समेत लाश मिली है।
क्या था हादसे का कारण? -घटनास्थल जोगिंदर सिंह मार्ग (जनकपुरी जिला केंद्र क्षेत्र) पर दिल्ली जल बोर्ड का पाइपलाइन या निर्माण कार्य चल रहा था। गड्ढा 20 फीट गहरा और पूल जैसा बड़ा था, लेकिन कोई बैरिकेडिंग, सुरक्षा संकेत, रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था। अंधेरे में कमल को गड्ढा नजर नहीं आया और उनकी Apache RTR 200 बाइक सीधे गड्ढे में जा गिरी। युवक ने हेलमेट, राइडिंग जैकेट और दस्ताने पहने हुए थे, लेकिन लापरवाही के आगे सब बेकार साबित हुआ।
परिवार का कहना है कि कमल रातभर गड्ढे में तड़पता रहा, अगर समय पर मदद मिलती तो शायद जान बच सकती थी। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड और पुलिस पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। कुछ परिजनों ने यहां तक कहा कि यह हत्या के समान है।यह मामला कैबिनेट मंत्री आशीष सूद के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण भी सुर्खियों में है। मंत्री ने मौके पर पहुंचकर जांच के आदेश दिए हैं। वहीं AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा कि नोएडा (युवराज मेहता) हादसे से सबक नहीं लिया गया।
यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में ग्रेटर नोएडा में भी एक खुले गड्ढे में युवराज मेहता की मौत हुई थी। दिल्ली में सड़क खोदाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम हो गई है। हर बार हादसे के बाद जांच और मुआवजे की बात होती है, लेकिन स्थायी समाधान कहां है?
लोगों से अपील: सड़क सुरक्षा को बनाएं प्राथमिकता निर्माण स्थलों पर हमेशा बैरिकेड और लाइट लगवाएं। रात में सड़क पर चलते समय सतर्क रहें। ऐसी लापरवाही देखें तो तुरंत 100/112 पर शिकायत करें।

 

 

 

 

 

 

 

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