व्हीलचेयर पर बैठा नहीं… उड़ता हुआ इंसान – मेरठ के नितिन की दिल छू लेने वाली कहानी

 

                                      Meerut के रहने वाले नितिन आज देश के उन चुनिंदा पैरा एथलीट्स में शामिल हैं, जिन्होंने जीवन के सबसे कठिन दौर को पार करते हुए केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बने। एक समय था जब 24 मार्च 2008 को हुए एक दर्दनाक हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी थी। आज वही नितिन Wheelchair Basketball Player, Cricketer, Rugby Player, National Para Athlete और Motivational Speaker के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। नितिन की जिंदगी 2008 से पहले सामान्य थी। ग्रेजुएशन के बाद वे अपने दोस्तों के साथ एक सामान्य युवा की तरह जीवन जी रहे थे। लेकिन 24 मार्च 2008 को एक अप्रत्याशित घटना ने सब कुछ बदल दिया। जानकारी के अनुसार, नितिन पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चला दी, जो उनके दिल के पास से गुजरते हुए स्पाइनल कॉर्ड में जा लगी। इस घटना के बाद उनका शरीर का निचला हिस्सा पैरालाइज हो गया और वे हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर गए। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया था कि वे अब अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाएंगे। हादसे के बाद नितिन लंबे समय तक मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझते रहे। उन्होंने सामाजिक दूरी बना ली और लोगों से मिलना-जुलना लगभग बंद कर दिया। समाज मेंबेचाराजैसे शब्दों ने उनके आत्मविश्वास को और कमजोर किया। हालांकि, इस कठिन समय में उनके परिवारविशेषकर माता-पिता और बहनने उन्हें निरंतर भावनात्मक सहारा दिया। करीब चार साल बाद, जब नितिन ने डिजिटल दुनिया से जुड़ना शुरू किया, तो उनकी सोच में बदलाव आया। उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे कई लोगों को देखा जो व्हीलचेयर पर रहते हुए भी खेल, मॉडलिंग और अन्य क्षेत्रों में सफलता हासिल कर रहे थे। यहीं से उनके अंदर नई शुरुआत करने की प्रेरणा जागी। दोस्तों के सहयोग से नितिन ने पहली बार देहरादून में आयोजित एक खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने Silver Medal जीता इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार मेहनत करते हुए  कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया । Gold और Silver Medals हासिल किए और उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी आईं, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। आज नितिन केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक सामाजिक प्रेरक के रूप में भी सक्रिय हैं। वे विशेष रूप से उन दिव्यांग व्यक्तियों के लिए काम कर रहे हैं: जो घर से बाहर नहीं निकलते,जो आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे हैं। नितिन उन्हें प्रेरित करते हैं, उन्हें खेल और मॉडलिंग जैसी गतिविधियों से जोड़ते हैं और समाज में सक्रिय जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। नितिन का मानना है कि जीवन में कितना भी बड़ा हादसा क्यों हो, समय के साथ परिस्थितियां बदल सकती हैंयदि व्यक्ति हार माने। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है। मेरठ के नितिन की यह यात्रा केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक संदेश भी है कि दिव्यांगता किसी की क्षमता को सीमित नहीं कर सकती। आज नितिन केवल खुद आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि सैकड़ों लोगों को भी आगे बढ़ने का रास्ता दिखा रहे हैं। 

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