तब होगी फिल्मे हीट जब फिल्म रिव्यू होंगे बंद

 

क्या 100 200 करोड बजेट का फिल्म ,एक हिट फॉर्मूला 100 पर स्टार अच्छी स्क्रिप्ट शानदार प्रमोशनल स्ट्रैटिजी चीज के ऊपर भी भारी है फिल्मों का एक रिवियू जी हाँ, फिल्मों के रिव्यु को लेकर एक डायरेक्टर ने बड़ी बात कही है। इंडस्ट्री में काम करने वाले डायरेक्टर का कहना है कि यूट्यूब पर ये जो रिव्युस होते हैं, इन्हें सबसे पहले बंद करना चाहिए। इन रिव्युस पर बैन लगाना चाहिए क्योंकि ये रिव्युस जो है फिल्मों को खराब करते हैं। हमने पिछले कुछ समय में देखा है की कई बड़ी फ़िल्में जिनको शानदार तरीके से प्रोमोट किया है, बावजूद उसके ये फ़िल्में फ्लॉप रही है। अब इन्हीं फिल्मों के फ्लॉप होने का कारण एक डायरेक्टर ने यूट्यूब रिव्युस को बताया है। इस डायरेक्टर का कहना है कि यह जो यू ट्यूब के रिव्युस है, ये रिलाएबल नहीं है क्योंकि ये लोग पैसों पर काम करते हैं। इन लोगों का कोटेशन बना रहता है। जिंस भी फ़िल्म का अच्छा रिव्यु देना होता है। ये आपने पेमेंट की लिस्ट भेज देते हैं और उस हिसाब से रिव्यु करते हैं। मैंने तो ऐसे भी रिव्यु करने वालों के बारे में सुना है जो दो ₹2 लाख देकर एक अच्छा ट्वीट आपकी फ़िल्म के लिए करते हैं। इस डायरेक्टर का कहना है कि रिव्युस करना इन दिनों एक धंधा बन गया है। प्रोड्यूसर से पैसा निकलवाने के लिए ये लोग धमकी भी देते है की अगर हमें पैसा नहीं दिया तो हम तुम्हारी फ़िल्म का निगेटिव रिव्यु करेंगे। सिर्फ यूट्यूब रिव्यु से नहीं बल्कि पब्लिक ओपिनियन से भी। इस डायरेक्टर ने आपत्ति जताई है और इस ने कहा है कि ये लोग जो थिएटर के बाहर जाकर लोगों से सवाल पूछते हैं, फ़िल्म कैसी लगी? ये भी बंद करना चाहिए। थिएटर ओनर्स को ऐसी चीज़ अपने थिएटर के बाउंड्रीज़ में करवाना बंद कर देना चाहिए। डाइरेक्टर का कहना है की ये यूट्यूबर्स बस अपने पैसे के बारे में सोचते हैं और इसके लिए ये करोड़ों के बजट से बनी फिल्मों तक को खराब कर देते हैं। इस डायरेक्टर ने आगे बढ़ते हुए ये भी कहा कि उन्होंने प्रोड्यूसर से और थिएटर ओनर्स से रिक्वेस्ट की है कि इन यूट्यूबर्स को रिव्यु करने से बैन करे। ये डाइरेक्टर है रोशन ऐंड रूस, जो कि मलयालम फिल्मों के डायरेक्टर हैं। उन्होंने कुछ समय पहले सैटरडे नाइट करके फ़िल्म बनाई थी और इस फ़िल्म ने एवरेज बिज़नेस किया था और उसी के बारे में बात करते हुए डायरेक्टर ने यूट्यूब रिव्युस को आप बताया है। अब इस पूरी चीज़ में सोचने वाली बात यह है कि जो लोग थिएटर में फ़िल्म देखने गए हैं और देख के आने के बाद वो अपना रिव्यु देते हैं तो क्या वो रिव्यु भी झूठा है? क्या वो रिव्यु भी फेक है? क्या वो रिव्यु भी पैसों से खरीदा हुआ है? ये बहुत बड़ा सवाल है? क्या अब फिल्ममेकर्स को अपने प्रॉडक्ट पर अपनी कहानी पर विश्वास नहीं रहा की वो अब यूट्यूब रिव्युस तक गिरने लगे? और कहने लगे हैं कि इन्हें बंद करवाओ ।

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